डेस्क : भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में ट्रेनों की सफाई, शौचालयों के रखरखाव और सफाई व्यवस्था के लिए तय बजट के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सर्वेक्षण में करीब आधे यात्रियों ने ट्रेन में सफाई व्यवस्था से असंतोष जताया।
40 फीसदी यात्री शौचालयों से परेशान
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 40 प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने शौचालयों में बदबू और जलभराव की शिकायत की। वहीं 50 प्रतिशत से अधिक यात्री ट्रेन में सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति और यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई जाने वाली सफाई सेवाओं से असंतुष्ट पाए गए।
बजट होने के बावजूद सफाई व्यवस्था पर सवाल
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे सफाई और रखरखाव के लिए हर साल बड़ी रकम का प्रावधान करता है, लेकिन ऑडिट के दौरान यह स्पष्ट करने वाला पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका कि वास्तव में सफाई पर कितना पैसा खर्च हुआ और कितनी राशि इस्तेमाल नहीं हुई।
ठेकेदारों पर जुर्माने का भी रिकॉर्ड नहीं
रिपोर्ट में ठेकेदारों की लापरवाही पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने और भुगतान में कटौती का कोई केंद्रीय और पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं मिला। रेलवे ने ऐसी कार्रवाई किए जाने का दावा किया, लेकिन उसके समर्थन में ऑडिट टीम को पर्याप्त प्रमाण या कुल जुर्माने की राशि का रिकॉर्ड नहीं दिया जा सका।
आधुनिक सफाई परियोजनाएं भी अटकीं
ट्रेनों और डिब्बों की आधुनिक सफाई के लिए स्वीकृत स्वचालित कोच धुलाई संयंत्र जैसी परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन भी रिपोर्ट में चिंता का विषय बना है। रिपोर्ट के अनुसार इन परियोजनाओं की प्रगति शून्य प्रतिशत रही। झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख स्टेशनों के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद संबंधित परियोजनाएं लंबित रहीं।
कैग की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय रेलवे में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के निष्कर्ष रेलवे की सफाई व्यवस्था, निगरानी और बजट के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।








