डिजिटल वित्त की अगली क्रांति एआई से आएगी: ज्योतिरादित्य सिंधिया

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 केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत में फिनटेक के अगले चरण के विकास के लिए दूरसंचार नेटवर्क, वित्तीय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश अब लोगों और प्लेटफॉर्म को जोड़ने से आगे बढ़कर इंटेलिजेंस को अवसरों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि भारत का दूरसंचार ढांचा तेजी से डिजिटल वित्तीय सेवाओं की रीढ़ बन रहा है। मोबाइल फोन अब एक तरह से ‘नए बैंक ब्रांच’ की भूमिका निभा रहा है, जबकि मोबाइल नेटवर्क क्रेडिट और निवेश जैसी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का माध्यम बनते जा रहे हैं।

उन्होंने 5जी, भारतनेट, आधार, यूपीआई, फिनटेक और एआई के एकीकरण को डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया। सिंधिया के मुताबिक, करीब 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली इंडिया एआई मिशन के तहत 38,000 जीपीयू, 14 क्लाउड पार्टनर और 7,500 डेटासेट के जरिए देश में एआई क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि एआई, दूरसंचार नेटवर्क और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के एक साथ आने से ऋण आकलन तेज हो सकता है, ग्राहकों को व्यक्तिगत वित्तीय सलाह मिल सकती है और धोखाधड़ी की पहचान वास्तविक समय में की जा सकती है। इससे वित्तीय व्यवस्था केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से जोखिम का अनुमान लगाने और उसे रोकने में सक्षम होगी।

हालांकि, सिंधिया ने तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल पहचान और वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य धोखाधड़ी होने के बाद उसकी पहचान करने से आगे बढ़कर लेनदेन में गड़बड़ी की आशंका को पहले ही पहचानकर उसे रोकना है।

उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अनिवार्य किए गए फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FFRI) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदिग्ध लेनदेन की पहचान और बैंकिंग क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय में मददगार है।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सिंधिया ने कहा कि यूपीआई अब 1,000 से अधिक बैंकों को जोड़ चुका है और सालाना करीब 240 अरब लेनदेन संसाधित कर रहा है। इन लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने बताया कि यूपीआई फिलहाल नौ देशों तक पहुंच चुका है और भारत इसे करीब 20 अन्य देशों तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।

सिंधिया ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का बड़ा बाजार नहीं रहा, बल्कि तकनीक बनाने, वैश्विक मानक तय करने और प्लेटफॉर्म विकसित करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य है कि देश में विकसित तकनीक दुनिया की सेवा करे और यह काम सुरक्षित तरीके से हो।

उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्त और तकनीक के बढ़ते स्वचालन के बीच नागरिकों को केंद्र में रखना सबसे महत्वपूर्ण है।