डेस्क : यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के मुद्दे पर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी विवाद गहरा गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इसी बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की अगस्त में आई रिपोर्ट चर्चा में आ गई है, जिसमें यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल और चरणबद्ध एमडीआर व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त संबंधी स्थायी समिति में कांग्रेस के पांच सांसद—पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—शामिल थे। समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दी थी। प्रकाशित कार्यवाही में किसी सदस्य की असहमति दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब ने की थी।
यूपीआई के लिए राजस्व मॉडल की जरूरत
समिति ने अपनी रिपोर्ट में यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लगातार निवेश की जरूरत पर जोर दिया था। समिति का कहना था कि मौजूदा प्रोत्साहन व्यवस्था लंबे समय तक यूपीआई के पूरे इकोसिस्टम की लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसे में यूपीआई के लिए स्थायी और व्यावहारिक राजस्व मॉडल तैयार करने की जरूरत है।
समिति ने हाई-वैल्यू यूपीआई लेनदेन के लिए टियर आधारित एमडीआर या अन्य राजस्व व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया था। अब इसी रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने किया विरोध
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित एमडीआर ढांचे का विरोध करते हुए इसे आम लोगों और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कदम बताया है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यूपीआई जैसी लोकप्रिय डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर शुल्क लगाने से छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा।
वहीं, सरकार की ओर से कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि कांग्रेस के सांसदों वाली संसदीय समिति ने स्वयं यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, समिति की सिफारिश और मौजूदा एमडीआर व्यवस्था के प्रावधानों को पूरी तरह समान नहीं माना जा सकता।
2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की बात कही गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान और 2000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान को शुल्क से बाहर रखने का प्रावधान बताया गया है।
सरकार का कहना है कि एमडीआर कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस व्यवस्था के संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रही है। यूपीआई शुल्क का मुद्दा अब संसद के बाहर भी कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है।








