डेस्क : केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है। सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का ‘भूत’ दिखाई देता है और देश के निर्माण की चर्चा के बजाय उनका ध्यान देश को बदनाम करने पर रहता है।
एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यूपीआई लेनदेन पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राहक से शुल्क लेना कानून का उल्लंघन होगा और इसे आपराधिक कृत्य माना जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एमडीआर केवल चुनिंदा व्यापारियों पर लागू होगा और इसका आम उपभोक्ता पर कोई सीधा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
सिंधिया के अनुसार, जिन व्यापारियों का मासिक यूपीआई लेनदेन एक लाख रुपये से अधिक है, उनमें से केवल एक सीमित वर्ग इस शुल्क के दायरे में आएगा। उन्होंने कहा कि यूपीआई के कुल लेनदेन में करीब 96 प्रतिशत लेनदेन दो हजार रुपये से कम मूल्य के होते हैं और इन पर एमडीआर शून्य रहेगा।
दो हजार रुपये तक कोई एमडीआर नहीं
संशोधित व्यवस्था के तहत दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगाया जाएगा। दो हजार से 75 हजार रुपये तक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित है, जबकि 75 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा निर्धारित की गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होगी।
सरकार के अनुसार, एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला कर या शुल्क नहीं है। इससे मिलने वाली राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और भुगतान एप प्रदाताओं के बीच वितरित की जाएगी, ताकि यूपीआई व्यवस्था के संचालन और विस्तार को बनाए रखा जा सके।
पारंपरिक भुगतान माध्यमों से कम दर
सिंधिया ने यूपीआई की प्रस्तावित एमडीआर दर की तुलना क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भी की। उन्होंने कहा कि क्रेडिट कार्ड लेनदेन की लागत आम तौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड की लागत करीब 0.9 प्रतिशत तक होती है, जबकि यूपीआई के लिए निर्धारित दर 0.4 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे। इसके अलावा, जिन व्यापारियों का मासिक यूपीआई कारोबार एक लाख रुपये से कम है, उन पर भी यह शुल्क लागू नहीं होगा। उपयोगिता बिल, रेलवे टिकट, बीमा और ईंधन भुगतान जैसी कुछ श्रेणियों में व्यापारी शुल्क पांच रुपये तक सीमित रहेगा।
राहुल गांधी ने लगाया था अमेरिकी दबाव का आरोप
राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि यह फैसला अमेरिकी दबाव के कारण लिया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिका के प्रति अपना रुख स्पष्ट करने और यूपीआई शुल्क वापस लेने की मांग की थी।
इसके जवाब में सिंधिया ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य यूपीआई ढांचे को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि यूपीआई के निर्माण और संचालन पर शुरुआत में सरकार ने करदाताओं के धन से पूंजीगत और वार्षिक परिचालन खर्च वहन किया। अब व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापारियों के लिए एक स्तरीय शुल्क ढांचा तैयार किया गया है।
सिंधिया ने कहा कि इस व्यवस्था से जुटने वाले संसाधनों का उपयोग सर्वर नेटवर्क और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के व्यापारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने के लिए किया जाएगा।
सरकार ने मंगलवार को भी स्पष्ट किया था कि नई व्यवस्था का व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यूपीआई के माध्यम से होने वाले सभी पी2पी लेनदेन पहले की तरह नि:शुल्क रहेंगे।







