दीनदयाल उपाध्याय के ‘चरैवेति’ मंत्र से सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान

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नई दिल्ली :   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके सेवा और निरंतर आगे बढ़ने के संदेश को याद किया। उन्होंने वडनगर-वाराणसी सेवा यात्रा के प्रतिभागियों से वर्चुअल संवाद के दौरान ‘चरैवेति-चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि निरंतर सेवा करते रहना ही सेवा यात्रियों का लक्ष्य होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भारत को विदेशी दृष्टिकोण से देखने के बजाय देश की अपनी परंपराओं और मिट्टी से जुड़ी दृष्टि दी। उनके ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन में सेवा की भावना को प्रमुख स्थान मिला, जो भाजपा के कार्यकर्ताओं और सरकारों को प्रेरित करती है।

मोदी ने महात्मा गांधी के सामाजिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधी केवल स्वतंत्रता आंदोलन के नेता नहीं थे, बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लगातार काम करने वाले समाज सुधारक भी थे। समाज में सकारात्मक बदलाव और निरंतर सुधार के लिए प्रयास जारी रहने चाहिए।

सेवा यात्रा के दौरान ग्रामीणों की ओर से प्रतिभागियों के स्वागत और आतिथ्य की प्रधानमंत्री ने सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा पहनी गई भगवा पगड़ियों का उल्लेख करते हुए सड़क सुरक्षा का संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोटरसाइकिल चलाते समय पगड़ी को हेलमेट का विकल्प न समझें और हेलमेट जरूर पहनें।

प्रधानमंत्री ने जनसेवा को सम्मान देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान स्वच्छता में योगदान देने वाले सफाईकर्मियों के पैर धोने की घटना को याद करते हुए कहा कि समाज और देश की सेवा करने वालों का सम्मान जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और योजनाएं लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने वाली हों। प्रधानमंत्री ने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।