नई दिल्ली : अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की क्रीमी लेयर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल का समय मांगा है। केंद्र ने अदालत से अनुरोध किया है कि फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने के बजाय भविष्य में लागू करने की अनुमति दी जाए, ताकि पहले से चल रही भर्ती प्रक्रियाओं और नियुक्तियों पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने ११ मार्च २०२६ को दिए अपने फैसले में ओबीसी क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता-पिता की केवल आय या वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद और अन्य निर्धारित मानदंडों को भी ध्यान में रखना होगा।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि फैसले को भविष्य की तारीख से लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का कहना है कि फैसले को तत्काल प्रभाव से पुरानी और वर्तमान भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू करने से वरिष्ठता, नियुक्ति और कैडर आवंटन जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
केंद्र ने अदालत को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव या उसे कमजोर करने की मांग नहीं कर रहा है। सरकार केवल फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दो वर्ष का समय चाहती है। इस दौरान संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने और विभिन्न सेवाओं में पदों की स्थिति स्पष्ट करने का काम किया जा सकेगा।
इस मामले से संबंधित कुछ याचिकाएं विभिन्न उच्च न्यायालयों में भी लंबित हैं। केंद्र ने इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। अब फैसले के प्रभाव को तत्काल लागू किया जाए या सरकार को दो वर्ष की मोहलत दी जाए, इस पर सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश से स्थिति स्पष्ट होगी।








