आगे राहुल, पीछे अखिलेश; क्या 2027 में बीजेपी को चुनौती देने की बन रही है नई रणनीति?

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नई दिल्ली : दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी दलों की महारैली के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक साथ ओपन बस में मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। बस में राहुल गांधी आगे और अखिलेश यादव पीछे बैठे नजर आए। दोनों नेताओं की इस तस्वीर को विपक्षी एकता के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की गई। इस दौरान विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता ओपन बसों में सवार होकर मिंटो रोड से रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। इनमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले, महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे।

एक बस में राहुल-अखिलेश, राजनीतिक संदेश के मायने

राहुल गांधी और अखिलेश यादव का एक ही ओपन बस में नजर आना महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता का राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन रही हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस जहां प्रदेश में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी राज्य में अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति को बनाए रखना चाहेगी।

सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस और सपा के बीच चुनौती

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस आधी सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी दावेदारी जता चुकी है। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से कांग्रेस से अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची देने की बात कही गई है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों का तालमेल आगामी चुनाव के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस इस महारैली के जरिए अपनी राष्ट्रीय राजनीतिक ताकत और जनाधार का प्रदर्शन भी कर रही है। वहीं अखिलेश यादव की मौजूदगी यह संकेत देती है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों के बीच साझा मंच बनाए रखने की कोशिश जारी है।

रामलीला मैदान की रैली से कांग्रेस को कितना फायदा?

इस महारैली में विपक्षी दलों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी देखी गई। रैली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दे रहे।

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी दलों के इन आरोपों और मांगों पर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है।

कुल मिलाकर रामलीला मैदान की यह तस्वीर केवल दिल्ली की सियासत तक सीमित नहीं है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की एक साथ मौजूदगी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन, सीटों के बंटवारे और नेतृत्व की भूमिका को लेकर चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। हालांकि, चुनावी गठबंधन और सीटों को लेकर अंतिम तस्वीर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगी।