बीदर (कर्नाटक): कर्नाटक में क्षेत्रीय विकास और आर्थिक असमानता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीदर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की कांग्रेस सरकार को विकास के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने सवाल किया कि जब बीदर शिक्षा, आय और गरीबी जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर राज्य के औसत से पीछे है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘क्या इसके लिए भी मैं जिम्मेदार हूं?’
बीदर की साक्षरता दर कर्नाटक के औसत से कम
ओवैसी ने अपने संबोधन में बीदर के बकदल क्षेत्र की साक्षरता दर का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यहां साक्षरता दर लगभग 65 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक का औसत 75 प्रतिशत है। उन्होंने इस अंतर को क्षेत्र में शिक्षा और विकास की चुनौतियों से जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
प्रति व्यक्ति आय में करीब दो लाख रुपये का अंतर
AIMIM प्रमुख ने कर्नाटक आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए कहा कि बकदल क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.75 लाख रुपये है, जबकि राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय करीब 3.75 लाख रुपये बताई गई है।
ओवैसी ने सवाल किया कि जब राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में आय का इतना बड़ा अंतर है, तो पिछड़े इलाकों के आर्थिक विकास के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
गरीबी सूचकांक में भी बीदर की स्थिति चिंताजनक
ओवैसी ने बीदर के गरीबी सूचकांक को लेकर भी कांग्रेस सरकार को घेरा। उनके मुताबिक, बीदर का गरीबी सूचकांक 11.25 है, जबकि कर्नाटक का औसत 7.58 है। उन्होंने इन आंकड़ों के जरिए क्षेत्र में गरीबी और आर्थिक असमानता की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया।
मुस्लिम समुदाय की आजीविका पर भी उठाया सवाल
अपने भाषण में ओवैसी ने कर्नाटक में हुए सामाजिक, शैक्षणिक एवं जाति सर्वेक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट में आजीविका के मामले में मुस्लिम समुदाय को 32वें और अंतिम स्थान पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति समुदाय के आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन को दर्शाती है।
उत्तरी कर्नाटक के विकास को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा
ओवैसी ने उत्तरी कर्नाटक और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में विकास की असमानता का मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार की योजनाओं और विकास परियोजनाओं के प्रभाव पर सवाल किए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लाभ उन क्षेत्रों तक पहुंचना भी जरूरी है, जो लंबे समय से आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं।
ओवैसी के इस बयान से कर्नाटक में क्षेत्रीय असमानता, शिक्षा, रोजगार और गरीबी जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस सरकार इन सवालों पर क्या जवाब देती है और पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए क्या कदम उठाती है।









