जयपुर । टोंक रोड स्थित महावीर नगर में गुरुवार को आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम में “अहंकार बनाम विनम्रता” विषय पर मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “अहंकार पतन का और विनम्रता विकास का मार्ग है।” उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य के जीवन में अंधकार और पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता व्यक्ति को महानता, सफलता और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाती है।
मुनिश्री ने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि अनन्त ज्ञान प्राप्त होने के बाद भी व्यक्ति को अपने उपकारियों के प्रति सदैव आभारी और विनम्र रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि विनम्रता व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है। यह केवल सामाजिक सम्मान ही नहीं दिलाती, बल्कि आत्मिक विकास का भी आधार बनती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “विनम्रता वरदान है और अहंकार अभिशाप।”
इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्म का मूल विनय है और उसकी अंतिम परिणति मोक्ष है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति विनम्रता के बिना संभव नहीं है। संसार की सर्वोच्च उपलब्धियाँ भी विनम्र स्वभाव वाले व्यक्तियों को ही प्राप्त होती हैं। विनम्रता व्यक्तित्व को आकर्षक और लोकप्रिय बनाती है तथा व्यवहार और आत्मा दोनों की शुद्धि का श्रेष्ठ साधन है।
कार्यक्रम की शुरुआत तीर्थंकर धर्म प्रभु की मंगल स्तुति से हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने ध्यान-योग, प्राणायाम, जप और तप जैसे आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता की। अंत में मंगलपाठ के साथ प्रवचन का समापन हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मुनिश्री के प्रेरणादायी संदेशों से आत्मिक लाभ प्राप्त किया।








