जैसे बॉर्डर पर BSF है; किरण बेदी ने CJP जैसे आंदोलन के लिए क्या आइडिया दिया

0

डेस्क। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व एलजी किरण बेदी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन से सीख लेते हुए केंद्र सरकार को एक नया विचार दिया है। बेदी ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए सुझाव दिया है कि जिस तरह सीमा पर सेना से आगे बॉर्डर सिक्यॉरिटी फोर्स (बीएसएफ) को तैनात किया जाता है, उसी तरह इस तरह के छात्र आंदोलनों को संभालने के लिए पुलिस से आगे सिविल डिफेंस को तैनात किया जाए, जिनके पास लाठी-डंडा या अन्य कोई हथियार ना हो। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ही पुलिस को आगे किया जाएगा।

जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रही सीजेपी और दिल्ली पुलिस के बीच पिछले तीन दिनों में कई बार टकराव की नौबत आ चुकी है। आंदोलनकारियों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई की तो वहीं हिंसक झड़पों में कई पुलिसकर्मी भी बुरी तरह जख्मी हुए हैं। इसे देखते हुए पूर्व अधिकारी ने सिविल डिफेंस वाले विचार पर गौर करने की सलाद दी है। उन्होंने एक वीडियो बनाकर भी लोगों से अपील की कि उनकी ओर से दी गई सलाह को देखें।

सीमा पर बीएसएफ की तैनाती की मिसाल

किरण बेदी ने कहा कहा कि उपद्रवी छात्रों से निपटने के लिए यह एक सुरक्षित रास्ता है। सरकार इस पर विचार कर सकती है। दिल्ली पुलिस के साथ गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी को टैग करते हुए उन्होंने कहा, ‘छात्रों और पुलिस के बीच सीधे टकराव से बचने के लिए प्रशिक्षित सिविल डिफेंस को आगे और उसके बाद पुलिस को तैनात करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस को कुछ दूरी पर रखा जा सकता है। किरण बेदी ने इसके लिए उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह सीमा पर सैनिकों से पहले बीएसएफ की तैनाती की जाती है, उसी तरह पुलिस से पहले सिविल डिफेंस को स्थिति संभालने का मौका दिया जाए।

हाथ में लाठी ना हो, जान-माल बचाने आएगी पुलिस: बेदी

बेदी ने कहा कि जब सुविल डिफेंस के नियंत्रण से स्थिति बाहर हो तब पुलिस आगे आएगी। उन्होंने कहा कि देश में हर राज्य में सिविल डिफेंस और होम गार्ड विभाग है। उनमें वेतन पर नियुक्त युवा महिला-पुरुष हैं। छात्र आंदोलन के समय वे पहली रक्षा पंक्ति बन सकते हैं। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे टकराव से बचा जा सकता है। उन्होंने प्रयोग के तौर पर, यह आजमाने को कहा कि सिविल डिफेंस के कर्मियों के हाथ में सिर्फ केन शील्ड हो जिससे वो खुद को ईंट, पत्थर और लाठी आदि से बचा सकें। उनके पास बॉडी आर्मर और हेलमेट हों, लेकिन कोई लाठी-डंडा नहीं। इसके बाद जिम्मेदारी प्रदर्शनकारी छात्रों पर होगी कि वे पुलिस को आगे आने की नौबत ना बनाएं। बेदी ने कहा कि पुलिस तभी आएगी जब जान माल की सुरक्षा की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इससे आरोप-प्रत्यारोप से बचा जा सकेगा।