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वॉशिंगटन: अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के साथ 40 दिनों के युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान अमेरिका के 42 सैन्य विमान नष्ट हो गए या उन्हें काफी नुकसान पहुंचेंगे। इनमें अमेरिका का सबसे अत्याधुनिक माना जाने वाला F-35 स्टील्थ फाइटर भी शामिल है। रिपोर्ट के हवाले से अमेरिकी नुकसान का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अमेरिका के ज्यादातर विमान युद्ध के आखिरी दिनों में नष्ट हुए।
रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका और इजरायल से जंग के दौरान ईरान ने अपने सीमित हवाई रक्षा संसाधनों को बेहतरीन इस्तेमाल किया। आइए जानते हैं कि ईरान ने कैसे अमेरिका के F-35 और दूसरे लड़ाकू विमानों को अपना शिकार बनाया, लेकिन उसके पहले अमेरिकी विमानों को हुए नुकसान पर एक नजर डालते हैं।
अमेरिका को किन विमानों का हुआ नुकसान
1 F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट
4 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट
1 ए-10 थंडरबोल्ट-II अटैक एयरक्राफ्ट
7 केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर रिफ्यूल एयरक्राफ्ट
1 ई-3 सेंट्री अवॉक्स
2 एमसी-130जे कमांडो II स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट
1 एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन II हेलिकॉप्टर
24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन
1 एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन
अमेरिकी विमानों को कैसे पहुंचा नुकसान?
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी विमानों को पहला झटका शुरुआत में ही लगा। 2 मार्च को सेंट्रल कमांड ने बताया कि कुवैत के ऊपर तीन F-15E विमान मार गिराए गए। इसे फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना की गोलीबारी) में हुई घटना बताया गया। चालक दल के सभी छह सदस्य सुरक्षित रूप से बाहर निकल आए।
चौथा विमान F-15E स्ट्राइक ईगल था, जिसे 5 अप्रैल को ईरान के ऊपर चल रहे अभियान के दौरान ईरानी सेना ने मार गिराया। चालक दल के दोनों सदस्य इजेक्ट करने में सफल रहे। क्रू को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने बड़ा अभियान चलाया और दोनों को सुरक्षित निकाल लिया। इस अभियान में दो MC-130J Commando II स्पेशल ऑपरेशन विमानों को अमेरिकी सेना ने तब नष्ट कर दिया जब वे आगे बढ़ने में असमर्थ हो गए थे।
अमेरिका के F-35 पर हमला
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिका को सबसे बड़ा झटका 19 मार्च को लगा जब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र के ऊपर एक F-35A जेट को निशाना बनाने में कामयाब रहा। हालांकि, यह अमेरिकी फाइटर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करने में सफल रहा, लेकिन यह इतिहास में पहली बार था जब अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के किसी स्टील्थ फाइटर जेट को हवा में निशाना बनाया गया था। हमले में फाइटर जेट को नुकसान पहुंचा था।
ईरान ने F-35 को कैसे बनाया निशाना
हालांकि, आधिकारिक जांच अभी भी जारी है लेकिन यूरेशियन टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि ईरान ने अपने F-35 को मिसाइल-ड्रोन हाइब्रिड सिस्टम से निशाना बनाया, जिसे ‘प्रोडक्ट-358’ नाम से जाना जाता है। प्रोडक्ट 358 को 358 मिसाइल या SA-67 भी कहा जाता है। यह एक लॉइटरिंग सरफेस-टू-एयर मिसाइल (जमीन से हवा में मार करने वाली) है। इसे ड्रोन, हेलिकॉप्टर और धीमी गति से या कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों का मुकाबला करने के लिए कम लागत वाले हथियार के तौर पर डिजाइन किया गया है।
इसे एक हाइब्रिड हथियार बताया जाता है, जो कुछ हद तक मिसाइल और कुछ हद तक कामिकेज या लॉइटरिंग म्यूनिशन (घूमकर हमला करने वाला हथियार) है। लॉन्च होने के बाद यह तय हवाई क्षेत्र में गश्त कर सकता है। साथ ही अपने अपा ही लक्ष्यों की तलाश कर सकता है या फिर उन्हें रोकने या उन पर हमला कर सकता है।
ईरान ने 3 अप्रैल को एक F-15e लड़ाकू विमान को मार गिराया था। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि इस विमान को थर्ड खोरदाद सिस्टम जैसे किसी मोबाइल मीडियम रेंज जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) से मार गिराया गया। अमेरिकी अधिकारियों और विश्लेषकों ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि यह MANPADS से किया गया किस्मत वाला हमला था।
ईरान के पास सैकड़ों शोल्डर-फायर्ड MANPADS हैं, जिनमें रूसी 9K38 Igla या वैसी ही हीट-सीकिंग मिसाइलों की ईरानी कॉपी भी शामिल है। विश्लेषकों के अनुसार, F-15 शायद कम ऊंचाई पर उड़ रहा था, जिससे वह मिसाइलों की चपेट में आ गया। उसी दिन फारस की खाड़ी में एक खोज और बचाव अभियान के दौरान अमेरिका का एक A-10 थंडरबोल्ट II विमान मारा गया। माना जा रहा है कि इस विमान को किसी शॉर्ट या मीडियम रेंज SAM या किसी MANPADS से मार गिराया गया होगा। यह कम ऊंचाई पर उड़ रहा था।
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