डेस्क : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले आठ हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। अधिकारों, शांति व्यवस्था और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान रावलाकोट और मीरपुर में तनाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे नागरिकों के खिलाफ अंधाधुंध गोलीबारी करने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पिछले तीन दिनों में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती और कई इलाकों में हुई झड़पों के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। उनका कहना है कि रावलाकोट में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस दौरान कई लोग हताहत हुए, जबकि आधिकारिक आंकड़े वास्तविक स्थिति से काफी कम बताए जा रहे हैं।
वहीं, मीरपुर में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
शव परिजनों को सौंपने से रोकने का आरोप
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मारे गए लोगों के शव उनके परिवारों को सौंपने में बाधाएं डाली जा रही हैं और कुछ मामलों में परिजनों की अनुमति के बिना अंतिम संस्कार किए जाने का दावा किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शवों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर वाहनों में ले जाया गया। इन आरोपों पर पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मीडिया कवरेज पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी मीडिया पर आंदोलन से जुड़ी वास्तविक स्थिति और हताहतों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो और स्थानीय लोगों के बयान हालात की गंभीरता को दर्शाते हैं।
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि सुरक्षाकर्मियों के साथ आए कुछ संदिग्ध लोगों ने दुकानों में लूटपाट, राशन चोरी और घरों में तोड़फोड़ की। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सख्ती के बावजूद जारी आंदोलन
सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों के आयोजकों का दावा है कि बुधवार को 500 से अधिक नए लोग धरने में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि अधिकारों, बेहतर शासन व्यवस्था और क्षेत्रीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार की मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
PoK में जारी यह आंदोलन अब स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर प्रशासनिक व्यवस्था, मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।








