डेस्क : सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों की आवाज सुनी जानी चाहिए और सरकार को उनकी सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी आंदोलनकारी को अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक भूख हड़ताल पर बैठा है तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह उससे संवाद करे और उसकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए समय रहते समाधान निकालना आवश्यक है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।
वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग की है। इस बीच अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है।








