लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट के आधार पर करीब 13 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
STF की सात पेज की रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, STF की सात पेज की जांच रिपोर्ट में KGMU के वर्तमान और पूर्व डॉक्टरों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ डॉक्टर दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, जबकि कुछ KGMU में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
रिपोर्ट के आधार पर करीब 13 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की आपात बैठक 6 नवंबर को प्रस्तावित है। इस बैठक में संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक समिति गठित करने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप
इस मामले की जांच के दौरान महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। आरोपों में कथित तौर पर शादी का झांसा देकर शोषण, उत्पीड़न, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव और शिकायतों को दबाने जैसी बातें शामिल हैं।
STF की रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों और डॉक्टरों पर शिकायतों के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं करने तथा आरोपियों को संरक्षण देने के आरोपों की भी पड़ताल की गई है।
डॉ. रमीज की गिरफ्तारी से शुरू हुई थी जांच
मामले में KGMU के पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन पर एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को कथित रूप से संबंध में फंसाने, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने तथा धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। इस मामले में उन्हें 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
STF ने जांच के दौरान KGMU के विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों और शिकायतों की पड़ताल की। रिपोर्ट में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड से जुड़े प्रकरणों का भी उल्लेख किया गया है।
जांच पूरी होने तक विभागाध्यक्ष बने रहेंगे या नहीं, होगा फैसला
STF रिपोर्ट में नाम आने के बाद KGMU के कुछ विभागाध्यक्षों और अन्य प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टरों की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद इस बात पर विचार कर सकती है कि जांच पूरी होने तक संबंधित डॉक्टर अपने मौजूदा प्रशासनिक पदों पर बने रहेंगे या नहीं।
KGMU प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की बात कही है। अब 6 नवंबर को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
फिलहाल, STF रिपोर्ट में दर्ज आरोपों और प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई के बीच अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएगा।







