उमर अब्दुल्ला की कुर्सी पर संकट के संकेत? नाराज विधायकों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी के बीच शुक्रवार को श्रीनगर में विधायकों के एक समूह ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और संभावित बगावत की अटकलों को तेज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई इस बैठक में करीब 17 नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हुए। बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी भी मौजूद थे। नाराज विधायकों की प्रमुख मांग उन मंत्रियों को हटाने की बताई जा रही है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। हालांकि, बैठक के बाद विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक साझा बयान जारी नहीं किया गया।

कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी

दरअसल, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए चार नए चेहरों को शामिल किया था। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। इस विस्तार के बाद कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ गया।

सबसे अधिक नाराजगी वरिष्ठ नेता और ईदगाह से विधायक मुबारक गुल के समर्थकों में देखने को मिली थी। उनके समर्थकों ने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर विरोध प्रदर्शन भी किया था। गुल ने भी अपने साथ हुए व्यवहार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि वह करीब 50 वर्षों से पार्टी से जुड़े हुए हैं।

रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान से भी बढ़ी चिंता

नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और चुनौती श्रीनगर के सांसद रूहुल्लाह मेहदी का संभावित इस्तीफा है। उन्होंने तीन नवंबर को पार्टी छोड़ने और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। मेहदी ने पार्टी नेतृत्व पर जम्मू-कश्मीर की जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है।

फारूक अब्दुल्ला के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती

पार्टी के भीतर एक के बाद एक सामने आ रहे असंतोष के घटनाक्रम ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला नाराज विधायकों को मनाने में कितने सफल होते हैं और पार्टी में बढ़ती नाराजगी को किस तरह नियंत्रित करते हैं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।