डेस्क : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर में होने वाली बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे में संभावना जताई गई है कि RBI अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगा।
RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है और 7 अक्टूबर को नीतिगत फैसले की घोषणा की जाएगी। अर्थशास्त्रियों के एक बड़े हिस्से का मानना है कि महंगाई के बढ़ते दबाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है।
महंगाई बनी बड़ी चुनौती
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है। खुदरा महंगाई में हालिया बढ़ोतरी के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ाई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आने वाले समय में ऊर्जा कीमतों पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर परिवहन लागत से लेकर उत्पादन और आम उपभोक्ता तक पड़ सकता है। इससे महंगाई को नियंत्रित रखने की RBI की कोशिशों पर दबाव बढ़ सकता है।
दिसंबर में भी बढ़ सकती है दर
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है तो अक्टूबर के बाद दिसंबर में भी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है। ऐसी स्थिति में रेपो रेट 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि, RBI आगे के फैसले महंगाई, आर्थिक विकास और वैश्विक परिस्थितियों के आंकड़ों को देखते हुए करेगा।
कर्ज लेने वालों पर बढ़ सकता है बोझ
रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है। इसके चलते होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है। इससे मौजूदा कर्जदारों की ईएमआई बढ़ सकती है और नए कर्ज लेने वालों के लिए भी उधारी महंगी हो सकती है।
वहीं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बैंक जमा और सावधि जमा पर ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना रहती है। ऐसे में अक्टूबर की MPC बैठक का फैसला महंगाई के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं और कर्जदारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








