लखनऊ : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, तो भाजपा से जुड़े लोगों के कथित अवैध निर्माणों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या कानून केवल विपक्षी नेताओं और उनके संस्थानों के लिए ही लागू होता है। उनका कहना था कि कानून के पालन में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित मानते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वयं निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं होने पर प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई करेगा और उसकी लागत भी विश्वविद्यालय प्रबंधन से वसूलेगा।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जिन भवनों का निर्माण किया गया था, उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इसलिए भवन निर्माण के लिए प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, विकास प्राधिकरण ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया है और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से विभिन्न कानूनी विवादों में घिरी रही है। भूमि अधिग्रहण सहित कई मामलों में इसके संस्थापक और पूर्व मंत्री आजम खान तथा उनके परिवार के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। अब भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।








