डेस्क : संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चीन के पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता बाई झाओडोंग की थाईलैंड में लगातार हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि उन्हें चीन प्रत्यर्पित किया गया तो उन्हें उत्पीड़न, यातना और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने थाई अधिकारियों से बाई झाओडोंग को चीन वापस न भेजने की अपील की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ (Non-refoulement) के सिद्धांत का हवाला दिया, जिसके तहत किसी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस नहीं भेजा जा सकता, जहां उसके उत्पीड़न या गंभीर नुकसान का वास्तविक खतरा हो।
बाई झाओडोंग वर्ष 2023 में अपने मानवाधिकार संबंधी कार्यों के कारण कथित उत्पीड़न का सामना करने के बाद चीन से भाग गए थे। इसके बाद उन्हें शरण मांगने वाले व्यक्ति के रूप में मान्यता मिली। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के मुताबिक, वह 21 जनवरी 2026 से थाईलैंड की आव्रजन हिरासत में हैं। मार्च में आव्रजन संबंधी अपराधों के लिए सुनाई गई दो महीने की जेल की सजा पूरी होने के बाद भी उनकी हिरासत जारी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बाई को किसी सुरक्षित तीसरे देश में बसाने की योजना भी कथित तौर पर दो बार रोकी जा चुकी है। इस बीच, चीनी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कहा कि केवल आव्रजन स्थिति किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की मांग करने वाले मानवाधिकार रक्षकों को ऐसे देशों में वापस नहीं भेजा जाना चाहिए, जहां उन्हें उत्पीड़न, यातना या किसी अन्य अपूरणीय नुकसान का खतरा हो।
थाईलैंड के नए निर्वासन नियमों पर भी चिंता
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने थाईलैंड में विदेशी नागरिकों के निर्वासन के लिए हाल में मंजूर किए गए नए मसौदा नियमों पर भी चिंता जताई है। थाई कैबिनेट ने 14 जुलाई 2026 को विदेशी नागरिकों के लिए एक समान और त्वरित निर्वासन प्रक्रिया के ढांचे को मंजूरी दी थी।
विशेषज्ञों ने माना कि सरकारों को अपने देश में आव्रजन व्यवस्था को नियंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन निर्वासन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में मजबूत मानवाधिकार सुरक्षा उपायों का होना जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से शरण प्रक्रिया तक पहुंच, प्रत्येक व्यक्ति के मामले में जोखिम का स्वतंत्र आकलन, प्रभावी न्यायिक समीक्षा और अपील लंबित रहने तक निर्वासन पर रोक जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत बताई। साथ ही, गैर-वापसी के सिद्धांत का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया।
UN विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि इन सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित नहीं किया गया तो नए नियम शरण मांगने वालों, शरणार्थियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को ऐसे देशों में जबरन वापस भेजे जाने का खतरा बढ़ा सकते हैं, जहां उन्हें उत्पीड़न या गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
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