डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी आगामी 22 जुलाई को प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर बूथ सम्मेलनों का आयोजन करेगी। इन सम्मेलनों के जरिए बूथ अध्यक्षों और पदाधिकारियों की सक्रियता, संगठन की मजबूती और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ प्रबंधन को सबसे अहम कड़ी माना जाता है। पार्टी का लक्ष्य है कि हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार रहे और मतदाताओं तक सरकार की योजनाओं और पार्टी के संदेश को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सके।
बूथ अध्यक्षों की होगी समीक्षा
22 जुलाई को होने वाले सम्मेलनों में बूथ अध्यक्षों से सीधा संवाद किया जाएगा। इस दौरान उनकी टीम, बूथ स्तर पर संपर्क अभियान, मतदाताओं से जुड़ाव और स्थानीय मुद्दों की जानकारी ली जाएगी। पार्टी संगठन यह भी परखेगा कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ता कितने सक्रिय हैं और चुनावी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए कितने तैयार हैं।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनाव में जीत के लिए केवल बड़े स्तर की रैलियां और प्रचार अभियान ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि बूथ स्तर पर मजबूत पकड़ निर्णायक भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने बूथ समितियों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया है।
वरिष्ठ नेता करेंगे कार्यकर्ताओं से संवाद
बूथ सम्मेलनों में भाजपा के वरिष्ठ नेता, मंत्री और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे। नेताओं द्वारा कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों के लिए दिशा-निर्देश दिए जाएंगे और जमीनी फीडबैक भी लिया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जहां संगठन कमजोर दिखाई देगा वहां सुधार की रणनीति बनाई जाएगी। निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जा सकता है।
मिशन चुनाव के लिए संगठन पर जोर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बूथ स्तर का नेटवर्क हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। भाजपा पिछले कई चुनावों में अपने बूथ प्रबंधन मॉडल को अपनी बड़ी ताकत के रूप में पेश करती रही है। आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी एक बार फिर संगठन के सबसे निचले स्तर को मजबूत करने में जुट गई है।
22 जुलाई का बूथ सम्मेलन भाजपा के लिए केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि चुनावी तैयारी की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।








