धर्म पूजा नहीं, जीवन जीने की कला है : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : टोंक रोड स्थित दुर्गापुरा के चौरड़िया क्राउन अपार्टमेंट के प्रवचन हॉल में रविवार को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ के सान्निध्य में “धर्म है जीने की कला” विषय पर आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुनिश्री ने अपने मार्मिक उद्बोधन में कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ और धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक श्रेष्ठ जीवनशैली और सलीके से जीवन जीने की कला है।

मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि धर्म अमृत भी बन सकता है और जहर भी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस दृष्टि से अपनाया जा रहा है। धर्म आस्था पर आधारित है, लेकिन आस्था ज्ञान और विवेक से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंध आस्था, अंधश्रद्धा और अंधविश्वास समाज के लिए घातक हो सकते हैं। भगवान महावीर ने भी सत्य की खोज स्वयं करने का संदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि अंध प्रथाओं और अंधरूढ़ियों को बढ़ावा देना धर्म नहीं है। धर्म का वास्तविक स्वरूप विवेक, करुणा और सदाचार में निहित है। जीवन के प्रत्येक कार्य में विवेक का समावेश ही धर्म को सार्थक बनाता है। विवेकपूर्ण जीवन जीना ही धर्म की मूल भावना है।

इस अवसर पर मुनि संभव कुमार जी ने कहा कि धर्म को केवल उपासना तक सीमित नहीं रखना चाहिए। धर्म हमारे आचार, विचार और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए। जीवन की प्रत्येक गतिविधि धर्ममय बने, इसके लिए विवेक चेतना का जागरण आवश्यक है।

कार्यक्रम में श्रीमती अनिला जी जैन ने संतों का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए, जबकि श्रीमती कुसुम जी दस्साणी ने सभी का आभार व्यक्त किया। प्रवचन कार्यक्रम के बाद मुनिश्री के सान्निध्य में श्री भोजराज चौरड़िया के नवीन फ्लैट पर भक्तामर स्तोत्र एवं नमस्कार महामंत्र का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया।

इससे पूर्व मुनि द्वय ने प्रातः 6:30 बजे अणुविभा केंद्र, मालवीय नगर से विहार प्रारंभ किया और सुबह 7:00 बजे चौरड़िया क्राउन अपार्टमेंट पहुंचे, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं ने संतों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

पूर्व डीजी जेल राजस्थान अरुण दुगड़ को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

जयपुर। अणुविभा केंद्र, मालवीय नगर में शनिवार को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनि संभव कुमार जी के सान्निध्य में स्वर्गीय श्री अरुण जी दुगड़ (पूर्व डी.जी. जेल, राजस्थान) को श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर समाज के गणमान्य नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं परिवारजनों ने स्वर्गीय अरुण जी दुगड़ के व्यक्तित्व और समाजसेवा में उनके योगदान को स्मरण किया। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।