डेस्क : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे छात्रों के आंदोलन की जीत करार दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि यह छात्रों के हौसले और एकजुटता की जीत है तथा अब देश में एक नए युग की शुरुआत होगी।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर छात्र आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा और शिक्षा के मुद्दे पर युवाओं की जीत ने व्यापक लोकतांत्रिक और संस्थागत सुधारों की नींव रखी है। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन आगे चुनावी अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ भी बदलाव की राह तैयार करेगा।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी छात्रों को आंदोलन की सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्रों ने अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन किया और विपक्ष ने उनके आंदोलन का समर्थन किया। गोगोई ने कहा कि केंद्र सरकार को विपक्ष की प्रमुख मांग माननी पड़ी और युवाओं ने लोकतंत्र की ताकत का प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री को इससे पहले ही पद से हटा दिया जाना चाहिए था। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि लाखों युवाओं ने लाठीचार्ज और अन्य मुश्किलों का सामना करते हुए अपना आंदोलन जारी रखा। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने भी छात्रों को इस घटनाक्रम का श्रेय देते हुए कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में से एक पूरी हुई है।
उधर, 37 दिनों से जारी आंदोलन वापस लिए जाने की घोषणा के बाद दिल्ली के कई हिस्सों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल होने लगी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगाए गए मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध हटाए गए। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी सभी स्टेशनों के प्रवेश द्वार खोलते हुए सामान्य परिचालन बहाल करने की जानकारी दी। हालांकि, भारी भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने लोगों को नई दिल्ली की ओर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी।
आंदोलनकारी संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार से मिले आश्वासनों के बाद संगठन ने सद्भावना के साथ आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया है। संगठन के मुताबिक, सरकार ने आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और शिक्षा सुधारों को लेकर आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। चार सप्ताह बाद फिर से वार्ता होने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र ने परीक्षा सुधार से जुड़ी मांगों को स्वीकार कर लिया है। वहीं, संगठन की ओर से रखे गए पांच सूत्रीय मांगपत्र पर सरकार आगे विचार करेगी।
इस बीच, आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूमिका को भी याद किया गया। संगठन ने उनके 26 दिन के अनशन को आंदोलन की नैतिक शक्ति बताया। वांगचुक ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया और छात्रों से जीत के बाद भी शांति और विनम्रता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने में है और अब शिक्षा तथा शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
वहीं, केंद्र सरकार देशभर में परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं और पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों और विशेष कार्यबल (एसटीएफ) समेत कई उपाय शामिल किए जाने की संभावना है।








