डेस्क : दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी मतदाता सूची के आंकड़ों में मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों को लेकर तस्वीर सामने आई है। दिल्ली की सात मुस्लिम बहुल सीटों में से पांच पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का प्रतिशत राजधानी के औसत से कम है। हालांकि ओखला और चांदनी चौक में मतदाताओं की संख्या में हुई कमी दिल्ली के औसत से काफी अधिक रही है।
चुनाव आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार दिल्ली में कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 32.7 प्रतिशत है। विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों में तुगलकाबाद में सबसे अधिक 48 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद ओखला का स्थान है।
ओखला और चांदनी चौक में ज्यादा कटौती
मुस्लिम बहुल सीटों में ओखला में सबसे अधिक 45.3 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। चांदनी चौक में 38.9 प्रतिशत मतदाताओं की संख्या कम हुई है। दोनों ही सीटों पर नाम हटाए जाने का प्रतिशत दिल्ली के औसत 32.7 प्रतिशत से अधिक है।
इसके मुकाबले बल्लीमारान में 32.6 प्रतिशत, मटिया महल में 34.5 प्रतिशत, मुस्तफाबाद में 28 प्रतिशत, बाबरपुर में 27 प्रतिशत और सीलमपुर में 23.3 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यानी सात मुस्लिम बहुल सीटों में पांच सीटों पर मतदाता कटौती राजधानी के औसत से कम रही।
दूसरी सीटों पर भी बड़ी कटौती
SIR के दौरान केवल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही बड़ी संख्या में नाम नहीं हटे हैं। कस्तूरबा नगर में 44.4 प्रतिशत और आरके पुरम में 44 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। इसके विपरीत रोहिणी में 16.5 प्रतिशत और शकूरबस्ती में 18.7 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग ने बताए नाम हटने के कारण
चुनाव आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 47.56 लाख नामों में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जो स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं। आयोग के मुताबिक करीब 43.3 प्रतिशत नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित होने के कारण हटाए गए। इसके अलावा करीब 2.8 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि लगभग 1.4 लाख मतदाता ऐसे थे जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने और आवश्यक होने पर नाम जुड़वाने या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया है।








