एआई के इस्तेमाल में आगे कंपनियां, लेकिन वास्तविक लाभ अब भी चुनौती

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डेस्क : कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सबसे अधिक प्रगति करने वाली कंपनियां अब अपनी टीमों का गठन उत्पादों, ग्राहकों के अनुभव और व्यावसायिक प्रक्रियाओं के आधार पर कर रही हैं। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ जिम्मेदारियां भी अधिक स्पष्ट हो रही हैं। वैश्विक परामर्श कंपनी मैकिन्से की एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कोई एक निश्चित संगठनात्मक व्यवस्था नहीं है। कंपनियों को अपनी कार्यप्रणाली सरल बनाने, अनावश्यक प्रक्रियाओं और विभागों के बीच तालमेल की बाधाओं को कम करने तथा बदलती प्राथमिकताओं के अनुसार संसाधनों का तेजी से आवंटन करने पर ध्यान देना होगा।

मैकिन्से के वर्ष २०२६ के कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी सर्वेक्षण के अनुसार, ८० प्रतिशत प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से व्यक्तिगत कार्यक्षमता में सुधार होने की बात कही। हालांकि, केवल ३७ प्रतिशत प्रतिभागियों ने ब्याज और कर चुकाने से पहले की आय पर सकारात्मक प्रभाव दर्ज किया, जबकि महज ६ प्रतिशत कंपनियां उच्च प्रदर्शन करने वाली श्रेणी में शामिल हुईं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल ११ प्रतिशत संगठनों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से काम करने के तरीकों और मूल्य सृजन की प्रक्रिया पर नए सिरे से विचार करने का चरण हासिल किया है। इससे स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत स्तर पर कार्यक्षमता बढ़ने के बावजूद कंपनियों के समग्र व्यावसायिक प्रदर्शन में इसका लाभ अभी सीमित है।

कामकाज की जटिलता कम करने में मिलेगी मदद

रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावी संगठनात्मक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रबंधन के कम स्तरों, कम प्रक्रियागत बाधाओं और कम मानवीय हस्तक्षेप के माध्यम से निर्णय लिए जा सकें। इसके साथ ही सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर हो और विभिन्न कार्यदल के बीच समन्वय स्थापित हो।

रिपोर्ट में संगठनों के भीतर बढ़ती जटिलता की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। पिछले पांच वर्षों में समन्वय से जुड़ी भूमिकाओं में वृद्धि की दर प्रत्यक्ष कार्यों से जुड़ी भूमिकाओं की तुलना में लगभग डेढ़ से दो गुना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग इस जटिलता को बढ़ाने के बजाय कम करने के अवसर के रूप में किया जाना चाहिए।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री एरिक ब्रायनजॉल्फसन ने मैकिन्से के साथ हालिया बातचीत में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण कर्मचारियों की संख्या घटाने पर ही ध्यान केंद्रित करना इसके व्यापक अवसरों की अनदेखी करना है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं के अनुरूप अपने कामकाज को नए सिरे से व्यवस्थित करेंगी।

अत्यधिक स्वचालन से कर्मचारियों के कौशल विकास पर असर की आशंका

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अत्यधिक निर्भरता कर्मचारियों के कौशल विकास को प्रभावित कर सकती है। शुरुआती स्तर के वे कार्य, जिनके माध्यम से कर्मचारी अनुभव प्राप्त करते हैं और विशेषज्ञता विकसित करते हैं, यदि पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सौंप दिए जाते हैं, तो भविष्य में निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यकारी प्रणालियां उन शुरुआती कार्यों को संभालने लगती हैं, जिनके माध्यम से लोग पारंपरिक रूप से विशेषज्ञता हासिल करते रहे हैं, तो आज उत्पादकता में होने वाला लाभ भविष्य में निर्णय क्षमता की कमी का कारण बन सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तैयारी में कंपनियां पीछे

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की तैयारियों से जुड़े एक अलग सर्वेक्षण में कर्मचारियों और संगठनों की तैयारियों के बीच अंतर सामने आया है। सर्वेक्षण में ७० प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्वयं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए तैयार बताया, जबकि केवल २७ प्रतिशत नेताओं का मानना था कि उनके संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वायत्त कार्यकारी प्रणालियों के भविष्य के लिए आवश्यक बदलाव करने को तैयार हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने होंगे। साथ ही, यह भी निर्धारित करना होगा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से तैयार किए गए कार्यों के लिए कौन जिम्मेदार होगा और उन पर मानवीय निगरानी किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।

इस संबंध में रिपोर्ट में एक वैश्विक जीवन विज्ञान कंपनी की नीति का उदाहरण दिया गया है। इस नीति के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर्मचारियों के काम में सहायता के लिए किया जाना चाहिए, न कि उनकी रचनात्मकता, विशेषज्ञता, स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता या निगरानी की भूमिका को समाप्त करने के लिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से किए गए कार्यों के लिए भी कर्मचारी जवाबदेह बने रहेंगे।

कार्यप्रणाली में बदलाव से ही मिलेगा वास्तविक लाभ

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनियां आवश्यक नहीं कि वही होंगी, जो सबसे अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यकारी प्रणालियों का उपयोग करेंगी या अधिकतम कार्यों को स्वचालित बनाएंगी।

वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से मूल्य सृजन के तरीकों को किस हद तक बदलती हैं। इसके लिए कार्यप्रणाली, कर्मचारियों के कौशल और प्रतिभा प्रबंधन तथा नेतृत्व व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करना महत्वपूर्ण होगा।