डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में लगातार तीसरे दिन युद्धविराम जैसी स्थिति बनी रही। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए शांति समझौता होने की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि इस दिशा में कुछ सकारात्मक होने की अच्छी संभावना है।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मेरे पास काफी धैर्य है। देखते हैं क्या होता है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका फिर से उसी सैन्य कार्रवाई की ओर लौट सकता है, जो संघर्ष विराम से पहले जारी थी।
हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि कुछ मध्यस्थ अमेरिकी पक्ष के संदेश ईरान तक पहुंचा सकते हैं, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही है। वहीं ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में दावा किया कि मध्यस्थ देशों के अनुरोध पर युद्धविराम का मौका दिया गया है और अमेरिका ईरान के साथ गहन बातचीत कर रहा है।
सऊदी अरब पर ड्रोन हमले
संघर्ष के बीच सोमवार को सऊदी अरब भी ड्रोन हमलों की चपेट में आया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों की ओर से इराक से तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई ड्रोन भेजे गए, जिन्हें रोक दिया गया। हालांकि, किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। रियाद ने इराक से अपनी जमीन का इस्तेमाल ऐसे हमलों के लिए नहीं होने देने की अपील की।
पाकिस्तान ने भी ड्रोन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें मध्य पूर्व की शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। दुनिया के प्रमुख तेल और गैस व्यापार मार्गों में शामिल इस जलडमरूमध्य पर ईरान अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले कई जहाजों को रोका है।
ईरान ने ओमान के साथ जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए साझा सिद्धांतों और संचालन व्यवस्था पर बातचीत की है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं में अमेरिका शामिल नहीं है।
ईरानी प्रवक्ता बघाई ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उसका व्यवहार ऐसे गिरोह जैसा रहा है, जो किसी नियम या कानून का पालन नहीं करता। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका का यह रवैया जारी रहता है, तब तक किसी तर्कसंगत प्रक्रिया की उम्मीद करना मुश्किल है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष में अस्थायी विराम का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। सोमवार को दुनिया के शेयर बाजारों में तेजी रही, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब छह फीसदी गिरकर लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। संघर्ष में यह अस्थायी राहत खाड़ी क्षेत्र की समुद्री आवाजाही और तेल उद्योग के लिए भी राहत लेकर आई है।





