ईरान के साथ कारोबार पर ट्रंप सख्त, चीनी बैंकों पर प्रतिबंध के संकेत

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डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को संकेत दिया कि उनका प्रशासन ईरान के साथ कारोबार में शामिल चीनी बैंकों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशों में बड़ी वृद्धि मानी जाएगी।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसी सप्ताह कहा था कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य उपायों के जरिए ईरानी सरकार को “ढहाने” के अभियान को तेज कर रहा है। इसके तहत उन देशों और संस्थानों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने का खतरा भी बढ़ाया गया है, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं।

चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच खासतौर पर तेल का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। चीनी बैंक इन लेनदेन और दोनों देशों के बीच होने वाले अन्य व्यापार से जुड़े भुगतान को अब भी संभालते हैं।

ओवल ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या अमेरिका ऐसे लेनदेन को लेकर चीनी बैंकों पर प्रतिबंध लगाएगा। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा, “किसने कहा कि मैं ऐसा नहीं कर रहा हूं?” उन्होंने आगे कहा, “आप नहीं जानते कि मैं ऐसा कर रहा हूं या नहीं। मुझे हर चीज की घोषणा करने की जरूरत नहीं है, है ना?”

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अब तक चीन के बड़े बैंकों पर इस मामले में सीधे प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। हालांकि, ईरानी सरकार और उसकी सशस्त्र सेनाओं की मदद करने के आरोप में मुख्यभूमि चीन और हांगकांग की कई कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

वहीं, चीन ने ईरान से जुड़े अमेरिकी सेकेंडरी प्रतिबंधों का विरोध करते हुए उन्हें “अवैध” करार दिया है। ऐसे में चीनी बैंकों को निशाना बनाए जाने की स्थिति में अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।