जी20 में ईरान पर बढ़ेगा अमेरिकी दबाव, आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति

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डेस्क : अमेरिका अगले सप्ताह होने वाली जी20 बैठक में ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अपने प्रयासों को तेज करेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों के साथ बैठक में ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के पालन का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

जी20 के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर सोमवार और मंगलवार को उत्तरी कैरोलिना के पहाड़ी शहर एशविल में बैठक करेंगे। इस वर्ष होने वाली यह प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठकों की पहली कड़ी है। इसके बाद दिसंबर में फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में जी20 नेताओं का शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है।

अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारी के मुताबिक, बैठक के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधि जी20 सदस्यों से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर जोर देंगे। बेसेंट अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी इस मुद्दे को सीधे उठा सकते हैं। हालांकि, अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी किन देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात तय है और क्या इसमें चीन भी शामिल है।

चीन पर भी बढ़ सकता है दबाव

ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति के सामने चीन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। चीन ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार है। ऐसे में वॉशिंगटन की प्रतिबंध नीति का असर अमेरिका-चीन संबंधों पर भी पड़ने की आशंका है। यह मुद्दा ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सितंबर में प्रस्तावित बैठक से पहले और संवेदनशील हो सकता है।

बेसेंट पहले ही ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकी दे चुके हैं। अमेरिका उन देशों को भी चेतावनी दे रहा है जो ईरान के साथ आर्थिक संबंध जारी रखते हैं।

व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर भी चर्चा

जी20 बैठक में अमेरिका अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा समेत महत्वपूर्ण संसाधनों की भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों को भी उठाएगा। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे व्यापक मुद्दों के बजाय इस वर्ष वॉशिंगटन की प्राथमिकता आर्थिक और वित्तीय विषयों पर अधिक रहने की उम्मीद है।

अटलांटिक काउंसिल के अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष जोश लिप्स्की के अनुसार, अमेरिका जी20 को ‘बैक-टू-बेसिक्स’ एजेंडे की ओर ले जाने की कोशिश कर सकता है। इसमें कर्ज, व्यापार, वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग नियमन जैसे पारंपरिक आर्थिक मुद्दों पर जोर रहेगा।

अमेरिकी नेतृत्व के सामने चुनौती

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक आर्थिक नेतृत्व में अमेरिका की भूमिका कई चुनौतियों से घिरी है। अमेरिकी कर्ज का बढ़ता स्तर चिंता का विषय है। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्कों ने कनाडा जैसे पारंपरिक सहयोगियों के साथ भी व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा किया है।

मध्य पूर्व में युद्ध ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं।

जी20 में अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक तनावों के बीच सदस्य देशों के बीच मतभेद बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। लिप्स्की ने कहा कि अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद और जी20 के अन्य सदस्यों पर प्रतिबंधों की चेतावनियां इस सवाल को जन्म देती हैं कि क्या यह समूह विभाजित हो सकता है। उनके मुताबिक, यही इस बैठक के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।