डेस्क : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने परमाणु समझौते को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के रुख की आलोचना की है। अराघची ने मैक्रों के पुराने बयानों और मौजूदा रुख के बीच अंतर पर सवाल उठाते हुए उनसे अपनी बात स्पष्ट रखने को कहा।
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने 2018 में अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष मैक्रों की ओर से दिए गए बयान का उल्लेख किया। उस समय मैक्रों ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता बनाए रखने की बात कही थी।
मैक्रों के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए अराघची ने कहा, “अपनी बात स्पष्ट रखिए, राष्ट्रपति महोदय।” उनके इस बयान को ईरान परमाणु समझौते को लेकर फ्रांस के वर्तमान दृष्टिकोण पर सवाल उठाने के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान परमाणु समझौते पर जारी है विवाद
वर्ष 2015 में ईरान और विश्व की प्रमुख शक्तियों के बीच संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) के नाम से परमाणु समझौता हुआ था। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ प्रतिबंधों के बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने की व्यवस्था की गई थी।
हालांकि, वर्ष 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका इस समझौते से बाहर हो गया। इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और समझौते की शर्तों को लेकर ईरान तथा पश्चिमी देशों के बीच मतभेद बने रहे।
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। वहीं, पश्चिमी देशों ने ईरान की परमाणु गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर चिंता जताई है।
तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद बरकरार
अराघची की ताजा टिप्पणी ईरान परमाणु समझौते और तेहरान के साथ बातचीत को लेकर पश्चिमी देशों के बीच जारी मतभेदों को दर्शाती है। परमाणु प्रतिबद्धताओं, आर्थिक प्रतिबंधों और भविष्य की वार्ताओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति अब भी एक प्रमुख कूटनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
फ्रांस और ईरान के बीच बयानों के माध्यम से सामने आया यह मतभेद ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।









