डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के नेतृत्व को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि आठवें महीने में पहुंच चुके अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच किसी को नहीं पता कि इस समय ईरान को वास्तव में कौन चला रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का पहला और दूसरा स्तर समाप्त हो चुका है और मौजूदा समय में देश की सत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने कहा, “उनके नेता जा चुके हैं, नेताओं का दूसरा समूह भी जा चुका है और मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी को नहीं पता कि आखिर देश चला कौन रहा है।”
हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि अमेरिका को अच्छी तरह पता है कि ईरान में उसका वार्ताकार कौन है और देश की निर्णय लेने की व्यवस्था किस तरह काम करती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्या ईरान के नेतृत्व को लेकर नहीं, बल्कि अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों और बदलते संदेशों को लेकर है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के पहले ही दिन मौत हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने सर्वोच्च नेता का पद संभाला। हालांकि, अपने पिता की मौत वाले हमले में घायल होने के बाद से मोजतबा सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
इस बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों और इजरायल के लेबनान में किए गए हमलों में अब तक हजारों लोगों की मौत तथा लाखों लोगों के विस्थापित होने की बात सामने आई है।
युद्ध का असर अब अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिख रहा है। संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे महंगाई और जीवन-यापन की लागत को लेकर अमेरिकी जनता की चिंता बढ़ी है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले यह स्थिति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि चुनाव में कांग्रेस पर नियंत्रण दांव पर है।
ट्रंप की लोकप्रियता भी जीवन-यापन की बढ़ती लागत और पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों को लेकर दबाव में है। युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की समयसीमा और घोषित लक्ष्यों में लगातार बदलाव ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है।






