वॉशिंगटन : अमेरिका ने शनिवार (स्थानीय समय) को ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को निशाना बनाते हुए यह कार्रवाई की। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि ये हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए गए। CENTCOM के अनुसार, कार्रवाई का मकसद जॉर्डन में अमेरिकी सैन्यकर्मियों पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार IRGC बलों को जवाब देना भी है।
CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने शनिवार शाम 6 बजे (ईटी) से ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों के जरिए IRGC की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और अमेरिकी कर्मियों पर हमले का जवाब देने की कोशिश की गई है।
जॉर्डन हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत
अमेरिकी कमांड ने इससे पहले पुष्टि की थी कि 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव अभियान के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य सैनिक अभी भी लापता है।
CENTCOM के अनुसार, हमले में घायल हुए चार अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में पहुंचाया गया था। बाद में सभी चार सैनिकों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि मामूली रूप से घायल अन्य कर्मी भी अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं।
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया था निशाना
इससे पहले शुक्रवार को ईरानी सेना ने दावा किया था कि उसने जॉर्डन स्थित अल-अजराक एयर बेस के ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है। ईरान ने इसे ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के 14वें चरण का हिस्सा बताया।
ईरानी सेना के मुताबिक, ड्रोन हमलों के जरिए जॉर्डन और कुवैत में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें कुवैत के अल-उदैरी कैंप में हथियार भंडार, अली अल-सलेम एयर बेस की इमारतें और गोला-बारूद डिपो समेत कई संचार केंद्र शामिल थे।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह कार्रवाई हुई है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की ओर से किए गए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।








