स्पोर्ट्स डेस्क : ईशान किशन की कप्तानी में पूर्व क्षेत्र ने दलीप ट्रॉफी २०२६ का खिताब अपने नाम कर लिया है। खास बात यह रही कि पूर्व क्षेत्र को फाइनल मुकाबला जीतने की जरूरत ही नहीं पड़ी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के नियम के अनुसार पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को मुकाबला बराबरी पर समाप्त होने की स्थिति में विजेता घोषित किया जाता है।
चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में पूर्व क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र के बीच खेला गया फाइनल मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए ७०८ रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। जवाब में दक्षिण क्षेत्र की पूरी टीम ३३६ रन पर सिमट गई। इस तरह पूर्व क्षेत्र को पहली पारी में ३७२ रन की बड़ी बढ़त मिली।
पहली पारी की बढ़त बनी खिताब की वजह
मैच में पहली पारी की बढ़त निर्णायक साबित हुई। पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में भी मजबूत स्थिति बनाए रखी और मुकाबले के अंत तक दक्षिण क्षेत्र के लिए जीत की राह बेहद मुश्किल कर दी।
बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक दलीप ट्रॉफी के फाइनल में यदि मुकाबला बराबरी या बिना परिणाम के समाप्त होता है, तो पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। इसी नियम के कारण पूर्व क्षेत्र ने बिना फाइनल जीते ही ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।
ईशान किशन का बल्ला जमकर बोला
पूर्व क्षेत्र की इस सफलता में कप्तान ईशान किशन की भूमिका सबसे अहम रही। उन्होंने पहली पारी में शानदार २७० रन की पारी खेली। इसके बाद दूसरी पारी में भी उन्होंने ८० रन बनाए। इस तरह फाइनल में ईशान किशन ने कुल ३५० रन बनाकर नया रिकॉर्ड कायम किया।
उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी ने पूर्व क्षेत्र को लंबे समय बाद दलीप ट्रॉफी में बड़ी सफलता दिलाई। पूर्व क्षेत्र ने करीब १४ साल बाद यह खिताब जीता है।
दक्षिण क्षेत्र को नहीं मिला वापसी का मौका
दक्षिण क्षेत्र की टीम पहली पारी में ३३६ रन पर आउट होने के बाद मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। पहली पारी में ३७२ रन से पिछड़ने के बाद उसके सामने मुकाबले में वापसी की बड़ी चुनौती थी।
पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में भी अपनी स्थिति मजबूत रखी और मैच को ऐसे मोड़ पर पहुंचा दिया, जहां दक्षिण क्षेत्र के लिए जीत हासिल करना लगभग असंभव हो गया। अंततः पहली पारी की बढ़त के आधार पर पूर्व क्षेत्र को विजेता घोषित किया गया।
पूर्व क्षेत्र की यह जीत ईशान किशन की शानदार बल्लेबाजी, कप्तानी और टीम के सामूहिक प्रदर्शन का नतीजा रही। खास बात यह रही कि फाइनल में जीत दर्ज किए बिना भी टीम ने बीसीसीआई के नियम के तहत प्रतिष्ठित दलीप ट्रॉफी अपने नाम कर ली।








