नई दिल्ली : भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया से जुड़े मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। अदालत की सलाह के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर सहमत हो गए हैं। दोनों की ओर से अदालत को बताया गया कि पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाए जाएंगे।
मामला गौरव भाटिया की ओर से दायर करीब 2 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे से जुड़ा है। भाटिया ने CJP के सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सामने आया, जिसे भाटिया ने फर्जी और मानहानिकारक बताया था।
AI से तैयार ग्राफिक को लेकर विवाद
मामले की शुरुआत एक कथित AI-जेनरेटेड ग्राफिक से हुई। यह ग्राफिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया गया था और इसमें गौरव भाटिया के नाम से स्वातंत्र्य भारद्वाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां दिखाई गई थीं। भाटिया ने इन टिप्पणियों से इनकार करते हुए पोस्ट को फर्जी बताया था।
इसके बाद उन्होंने पोस्ट हटाने और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की थी। सौरव दास ने बाद में संबंधित पोस्ट हटा दी थी और बताया था कि ग्राफिक AI की मदद से तैयार किया गया था।
HC ने कहा- बिना पुष्टि पोस्ट करना ठीक नहीं
सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने CJP नेताओं को सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि विरोध या असहमति व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं और अपनी बात को जिम्मेदारी तथा स्पष्टता के साथ रखना जरूरी है।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि संबंधित पक्ष स्वयं पोस्ट हटा देते हैं तो तत्काल कोई बाध्यकारी आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने 24 घंटे में पोस्ट हटाने पर सहमति जताई।
गौरव भाटिया को भी अदालत की सलाह
सुनवाई के दौरान अदालत ने गौरव भाटिया से भी कहा कि मामले को अदालत तक ले जाने से पहले आरोपियों से सीधे बातचीत कर समाधान की कोशिश की जा सकती थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे विवादों को कई बार आपसी संवाद के जरिए भी सुलझाया जा सकता है।
मामले में अभिजीत दीपके की भूमिका को लेकर भी अदालत में सवाल उठा। रिपोर्ट के अनुसार याचिका में उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं होने के कारण उन्हें मामले से बाहर कर दिया गया।
यह मामला सोशल मीडिया पर AI से तैयार सामग्री के इस्तेमाल, तथ्य-जांच और सार्वजनिक व्यक्तियों के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस को भी सामने लाता है।








