फ्लाईदुबई हाईजैक की कोशिश: हम्माम अल-हम्मामी का ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन

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फ्लाईदुबई के विमान को हाईजैक करने की कथित कोशिश के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां अब विमान के सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय और उसकी गतिविधियों की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी सह-पायलट करीब दो साल तक ऑस्ट्रेलिया में छात्र के तौर पर रहा था।

जानकारी के मुताबिक, ओमानी नागरिक सह-पायलट ने वर्ष 2014 में ऑस्ट्रेलिया का छात्र वीजा प्राप्त किया था। वह वर्ष 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई कर रहा था। बाद में वह ऑस्ट्रेलिया से चला गया। वर्ष 2019 में उसका छात्र वीजा रद्द कर दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, वीजा रद्द किए जाने के पीछे उस समय कोई चरित्र या सुरक्षा संबंधी कारण सामने नहीं आया था।

ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान सह-पायलट के किसी संदिग्ध व्यक्ति या संगठन से संपर्क तो नहीं थे। उसकी पढ़ाई, गतिविधियों और उस दौरान बने संपर्कों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक यह सामने नहीं आया है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान उसने किसी आतंकी या चरमपंथी गतिविधि में हिस्सा लिया था।

विमान के कॉकपिट में हुआ था हमला

यह घटना दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई। आरोप है कि सह-पायलट ने कॉकपिट में मौजूद भारतीय मूल के पायलट पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। घटना के दौरान विमान अचानक नीचे की ओर जाने लगा, जिससे उसमें सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई।

हालात बिगड़ने के बाद पायलट ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों की मदद से सह-पायलट को काबू किया गया। विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक में उतारा गया। इस घटना में विमान को बड़े हादसे से बचा लिया गया।

चरमपंथी विचारों को लेकर भी जांच

जांच एजेंसियां सह-पायलट के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही हैं। बताया जा रहा है कि अतीत में उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। उसे कुछ समय के लिए उड़ान भरने से भी रोका गया था। बाद में उसने विमानन क्षेत्र में दूसरी भूमिका में काम किया और इसके बाद फ्लाईदुबई में सह-पायलट के तौर पर नियुक्त हुआ।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ अन्य देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी मामले की जांच में जुटी हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि विमान को हाईजैक करने की कोशिश के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका थी।

फिलहाल जांच एजेंसियां सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय, उसके संपर्कों और बाद की गतिविधियों को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ऑस्ट्रेलिया में उसकी पढ़ाई और विमान में हुई इस गंभीर घटना के बीच कोई संबंध था या नहीं।