डेस्क : अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच में कुछ प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है और जिम्मेदारी तय करने के बजाय उन्हें गवाह बनाया गया है।
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं का उल्लेख सामने आया है, लेकिन जांच में केवल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य रहे अनिल मिश्रा को गवाह बनाए जाने पर भी सवाल उठाया।
जयराम रमेश ने जांच में कथित देरी को लेकर भी सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा। कांग्रेस का कहना है कि चोरी से संबंधित वीडियो और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब 21 दिन का समय लगा। पार्टी ने इस देरी की वजह स्पष्ट करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चोरी के मामले में करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी हुई है, जबकि घटनाओं की संख्या को देखते हुए कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केवल कथित चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि मंदिर परिसर में ऐसी घटनाएं कैसे हुईं और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों की जवाबदेही क्या है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर राजनीतिक निशाना साधते हुए कहा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी व्यक्ति को प्रभाव या पद के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।








