फ्रांस में बढ़ा तनाव, भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

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डेस्क :  फ्रांस के कई शहरों में जारी हिंसक प्रदर्शनों और स्थानीय स्तर पर लगाए गए कर्फ्यू के मद्देनजर भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे और यात्रा कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीयों से सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि जिन इलाकों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहां जाने से बचें। नागरिकों को स्थानीय फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों से स्थानीय समाचारों के माध्यम से स्थिति पर नजर रखने और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में संभावित व्यवधान की जानकारी लेते रहने को कहा गया है।

आपात स्थिति में सहायता के लिए पेरिस स्थित भारतीय दूतावास और मार्सेई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने हेल्पलाइन संपर्क भी उपलब्ध कराए हैं।

24 अक्टूबर को फिर बड़े प्रदर्शन की आशंका

फ्रांस में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने 24 अक्टूबर को प्रस्तावित नए प्रदर्शनों से पहले बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने का वादा किया है। सरकार ने कई क्षेत्रों में कर्फ्यू बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का फैसला किया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नुनेज ने स्वीकार किया कि अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों की गंभीरता का सही आकलन नहीं किया था। शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ शहरों में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए थे।

न्याय मंत्री जेराल्ड दारमैनिन के अनुसार, सोमवार शाम तक 2,500 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका था। हिंसा के दौरान लिमोज शहर के एक ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई, जबकि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।

पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक और लेस आल इलाके में रात के समय कर्फ्यू लगाया गया है। लियोन समेत अन्य शहरों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं। अधिकारियों ने सोमवार रात पेरिस और लियोन में अपेक्षाकृत शांत स्थिति रहने के बावजूद सुरक्षा प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

स्कूलों की बदहाल स्थिति और महंगाई के खिलाफ आंदोलन

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत सितंबर के मध्य में हुई थी। पेरिस के उपनगरीय इलाकों में हाई स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने कक्षाओं में बढ़ती भीड़, जर्जर स्कूल भवनों और शिक्षकों की कमी को लेकर आवाज उठाई थी।

धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक होता गया और इसमें ट्रेड यूनियनों तथा येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी बढ़ गई। अब यह प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं की गिरती गुणवत्ता और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का रूप ले चुका है।

सरकार ने जरूरतमंद स्कूलों में 3,000 से अधिक वैकल्पिक शिक्षकों की तैनाती की योजना घोषित की है। इसके अलावा, कई सौ नए शिक्षकों की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई है। हालांकि, आर्थिक दबाव और राजनीतिक मतभेदों के कारण व्यापक सुधार लागू करना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

आर्थिक संकट और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही सरकार

फ्रांस की आर्थिक स्थिति भी सरकार के लिए चिंता का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जून के अंत तक देश का सार्वजनिक ऋण लगभग 3.6 लाख करोड़ यूरो तक पहुंच गया था, जो देश के वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद का करीब 119 प्रतिशत है।

सरकार को चालू वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 5.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। वर्ष 2027 तक इसे घटाकर 5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

राजनीतिक मोर्चे पर भी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संसद में उनके सहयोगी दलों के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, जिससे बड़े नीतिगत फैसलों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो रहा है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने रविवार को अपने संबोधन में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और हिंसा, आगजनी तथा लूटपाट में शामिल लोगों के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को सुनेगी, लेकिन हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

फ्रांस में जारी तनाव के बीच भारतीय दूतावास की एडवाइजरी भारतीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में वहां रह रहे और यात्रा कर रहे भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें।