ज्ञान के साथ चरित्र जरूरी, तभी सार्थक होती है सफलता : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी

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जयपुर : शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संस्कार, नैतिकता और चरित्र से समृद्ध करने की साधना है। जब प्रतिभा के साथ चरित्र जुड़ता है, तभी सफलता सार्थक और सम्मान योग्य बनती है। इसी संदेश के साथ रविवार को अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF) द्वारा मेधावी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह में समाज के 80 मेधावी प्रतिभागियों तथा संस्था से जुड़े 25 नवीन बुद्धिजीवी सदस्यों को मेडल, प्रमाण-पत्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। राजस्थान सरकार के पूर्व मुख्य सचिव श्री राजीव जी स्वरूप मुख्य अतिथि तथा समाजशास्त्री प्रोफेसर रमेश जी अरोड़ा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

सफलता की सुगंध के लिए चरित्र जरूरी

मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “चरित्रवान मेधावी का सदा सम्मान होता है।” उन्होंने कहा कि सफलता और सम्मान का मूल आधार केवल ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र है। इसलिए जीवन का मुख्य ध्येय चरित्रवान बनना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नैतिकता, ईमानदारी और प्रामाणिकता सफलता को वास्तविक गरिमा प्रदान करती हैं। नैतिकता से विहीन सफलता उस फूल के समान है, जिसमें सुगंध नहीं होती। शिक्षा यदि व्यक्ति को केवल बुद्धिमान बनाए, लेकिन उसके जीवन में संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास न करे, तो उसकी सार्थकता अधूरी रह जाती है।

समारोह में वक्ताओं ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और युवाओं को समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए ज्ञान के साथ संस्कार और सेवा की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा तथा टी.पी.एफ. के उपाध्यक्ष श्री पवन जी जैन ने भी अपने विचार रखे। संस्था के राष्ट्रीय टी.पी.एफ. सदस्य श्री छवि जी बेगानी ने संस्था की विभिन्न गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों की जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में स्थानीय संस्था के अध्यक्ष श्री सुमित जी जैन ने स्वागत भाषण दिया। संस्था की मंत्री श्रीमती नेहा जी दूगड़ ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि श्रीमती गीतांजलि जी जैन ने आभार व्यक्त किया।

समारोह में तेरापंथी सभा के मंत्री श्री राजकुमार जी बाफना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र जी बांठिया, तेरापंथ महिला मंडल सी-स्कीम की अध्यक्षा श्रीमती कनक जी आंचलिया, मंत्री श्रीमती राजश्री जी बाफना, तेरापंथ महिला मंडल शहर की मंत्री श्रीमती पायल जी जैन, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री विनोद जी वैद, मंत्री श्रीमती जयश्री जी सिद्धा सहित करीब 250 प्रतिभागी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।

समारोह का मूल संदेश यही रहा कि प्रतिभा व्यक्ति को ऊंचाई दे सकती है, लेकिन चरित्र ही उस ऊंचाई को गरिमा प्रदान करता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति बनाना नहीं, बल्कि ऐसा श्रेष्ठ मनुष्य तैयार करना होना चाहिए, जिसके ज्ञान में विनम्रता, सफलता में नैतिकता और जीवन में समाज के प्रति संवेदनशीलता हो।