डेस्क : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल में संगठन से लेकर नेतृत्व तक हलचल तेज हो गई है। चुनावी झटके के बाद पार्टी ने प्रदेश से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक सभी सांगठनिक कमेटियों को भंग कर दिया है। सभी प्रकोष्ठों को भी समाप्त कर दिया गया है। अब पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की जिम्मेदारी कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के हाथों में होगी।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने गुरुवार को सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने का आदेश जारी किया। पार्टी नेतृत्व का यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद राजद के भीतर ही नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
बांकीपुर ने बढ़ाई राजद की मुश्किल
पटना की बांकीपुर सीट पर राजद की प्रत्याशी रेखा गुप्ता को महज 14,085 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। चुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा दूसरे स्थान पर रही। राजद के लिए यह नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा के मजबूत गढ़ के तौर पर देखा जाता रहा है।
इस हार के बाद पार्टी के भीतर संगठन की भूमिका और चुनावी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने हार के लिए संगठनात्मक कमजोरी को जिम्मेदार ठहराते हुए तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर निशाना साधा। जवाब में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी पलटवार किया। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने राजद के अंदर चल रहे मतभेदों को सामने ला दिया।
तेजस्वी के सामने संगठन को फिर खड़ा करने की चुनौती
राजद की सभी कमेटियों को भंग करने के फैसले को महज संगठनात्मक फेरबदल के बजाय पार्टी की राजनीतिक दिशा को नए सिरे से तय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक नई टीम बनाकर तेजस्वी यादव संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी दे सकते हैं।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब राजद लगातार चुनावी झटकों के बाद अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की चुनौती से जूझ रहा है। नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के विधायकों की संख्या घटकर 25 रह गई थी। ऐसे में बांकीपुर की हार ने पार्टी नेतृत्व के सामने जमीनी संगठन को मजबूत करने का सवाल और बड़ा कर दिया है।
नेताओं की नाराजगी भी बनी चुनौती
बांकीपुर के नतीजों से पहले राजद के पूर्व प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के भाजपा में जाने और चुनाव परिणाम के बाद भाई वीरेंद्र तथा शक्ति सिंह यादव के बीच हुई तकरार ने पार्टी के भीतर असंतोष की तस्वीर को और स्पष्ट किया है। अब संगठन की सभी इकाइयां भंग होने के बाद निगाहें इस बात पर हैं कि तेजस्वी यादव नई टीम में किन चेहरों को जगह देते हैं और पार्टी की कमान को जमीनी स्तर पर किस तरह मजबूत करते हैं।
राजद के लिए यह सिर्फ संगठन बदलने का फैसला नहीं, बल्कि बांकीपुर की हार के बाद अपनी राजनीतिक जमीन और कार्यकर्ताओं के भरोसे को फिर से मजबूत करने की बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।









