हिंसा से नहीं, अहिंसा से मिलता है अभय का वरदान: मुनिश्री तत्त्व रुचि

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जयपुर : मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र के महाप्रज्ञ सभागार में तेरापंथ युवक परिषद के बैनर तले आयोजित बारहव्रत कार्यशाला में गुरुवार को श्रावक-श्राविकाओं ने संतों की प्रेरणा से ‘अनर्थ दण्ड विरमण व्रत’ के अंतर्गत अनावश्यक हिंसा से दूर रहने का संकल्प लिया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए व्रतों के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्ष को समझकर उन्हें जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में प्रेरणा प्रदान करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि करनी कभी निष्फल नहीं होती। व्यक्ति द्वारा किया गया कर्म और दिया गया दान व्यर्थ नहीं जाता। शुभ कर्म का शुभ और अशुभ कर्म का अशुभ परिणाम प्राप्त होता है। भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति की अपनी सुप्रवृत्ति और दुष्प्रवृत्ति ही उसके जीवन में अनुकूलता और प्रतिकूलता का कारण बनती है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में अनुकूलता चाहता है और प्रतिकूलता किसी को भी पसंद नहीं होती। ऐसे में आवश्यक है कि व्यक्ति कम से कम अनावश्यक पापकारी कार्यों से स्वयं को बचाने का प्रयास करे। अनर्थकारी कार्यों से विरति आत्मशुद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मोहनीय कर्म पर विजय का महत्व

तत्त्वज्ञान की चर्चा करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ने कहा कि आठ कर्मों में मोहनीय कर्म सर्वोपरि है। जो व्यक्ति मोहनीय कर्म पर विजय प्राप्त कर लेता है, उसके लिए अन्य कर्मों पर विजय प्राप्त करना भी सहज हो जाता है। ‘भरत मुक्ति’ गेय व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने अहिंसा को भय से मुक्ति का मार्ग बताते हुए कहा कि वास्तविक अभय का वरदान हिंसा से नहीं, बल्कि अहिंसा से प्राप्त होता है।

हिंसा की जड़ परिग्रह और लोभ

मुनिश्री संभव कुमार जी महाराज ने कहा कि हिंसा का मूल परिग्रह है। उन्होंने लोभ को सभी पापों की जड़ बताते हुए कहा कि लोभ से लाभ और लाभ से फिर लोभ बढ़ने का सिलसिला लगातार चलता रहता है। इस प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए इच्छा परिमाण व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी साधन है। इच्छाओं को सीमित करने से व्यक्ति के भीतर संयम, संतोष और आत्मानुशासन का विकास होता है।

कार्यशाला के दौरान जप-तप सहित विभिन्न आध्यात्मिक उपक्रम भी आयोजित किए गए। तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की मंत्री श्रीमती पायल जी जैन ने बताया कि 4 सितंबर 2026 को अणुविभा केन्द्र में मंडल की ओर से सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन किया जाएगा।

बारहव्रत कार्यशाला के माध्यम से श्रद्धालुओं को केवल व्रतों की जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में संयम, अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मानुशासन के सिद्धांतों को उतारने की प्रेरणा भी दी जा रही है।