डेस्क : नेपाल के रसुवा जिले और आसपास के इलाकों में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद तबाही का मंजर जारी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि 1,545 लोगों को बचाया गया है या वे घायल हुए हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक चितवन में सबसे अधिक 178 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद एनपी ईस्ट में 110, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धादिंग में 33, तनहूं में 28, एनपी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 लोगों की मौत हुई है।
बचाव अभियान के तहत रसुवा से 644 लोगों, नुवाकोट से 898 लोगों और धादिंग से तीन लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। बाढ़ के बीच नेपाल पुलिस के 28 जवान भी अब तक लापता हैं।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, गुरुवार तक 977 लोग लापता थे। दूरदराज और बुरी तरह प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव दलों के पहुंचने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
नेपाल पुलिस ने राहत और बचाव अभियान में 4,348 कर्मियों को तैनात किया है। नेपाल सरकार ने प्रभावित जिलों के लिए 2.5 करोड़ नेपाली रुपये की राहत राशि जारी की है। इसमें रसुवा और नुवाकोट के लिए 1-1 करोड़ रुपये तथा धादिंग के लिए 50 लाख रुपये शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल को मदद मिलनी शुरू हो गई है। अमेरिका ने 5 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता की घोषणा की है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री भेजने के साथ नेपाल के प्रति एकजुटता जताई है।
विदेशी नागरिकों की सहायता और समन्वय के लिए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष (ईसीआर) स्थापित किया है। यह केंद्र खोज एवं बचाव, सूचनाओं के सत्यापन और प्रभावित विदेशी नागरिकों को कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने का काम करेगा।
नेपाल में काम कर रहे भारतीय नागरिक भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों के सुरक्षित बचाए जाने की जानकारी दी है। वहीं 288 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेपाल के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की भारत की प्रतिबद्धता जताई है।
26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई इस भीषण बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी, मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों का तेज बहाव ला दिया, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है।








