कांग्रेस में सोशल मीडिया पर सख्ती, राहुल गांधी ने नेताओं की गतिविधियों पर निगरानी के दिए निर्देश

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डेस्क : कांग्रेस के भीतर पार्टी नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता को लेकर अब निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पार्टी नेतृत्व यह आकलन करना चाहता है कि उसके नेता सामाजिक न्याय समेत कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों और आधिकारिक रुख को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कितनी मजबूती और प्रभावी तरीके से सामने रख रहे हैं।

राहुल गांधी का यह निर्देश कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद सामने आया है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पार्टी नेताओं की सार्वजनिक सक्रियता और सोशल मीडिया पर उनकी भूमिका को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी किसी मुद्दे को राजनीतिक रूप से प्रमुखता देती है, तो उसके नेता उसे जनता के बीच उतनी मजबूती से क्यों नहीं उठाते।

खरगे की नाराजगी के बाद सक्रिय हुआ संगठन

सीडब्ल्यूसी की बैठक में खरगे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पार्टी नेताओं से जिस राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जाती है, वह दिखाई नहीं दी।

हालांकि, कुछ नेताओं ने बाद में दावा किया कि पार्टी पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किए थे और उनमें भाग भी लिया था। इसके बावजूद खरगे का संदेश साफ था कि कांग्रेस नेताओं को पार्टी के वैचारिक और राजनीतिक मुद्दों पर अधिक मुखर होकर सामने आना होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकजुट संदेश की तैयारी

राहुल गांधी के निर्देश को कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति को अधिक केंद्रीकृत और अनुशासित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का जोर अब इस बात पर है कि उसके नेता अलग-अलग मुद्दों पर बिखरे हुए संदेश देने के बजाय कांग्रेस के आधिकारिक राजनीतिक रुख को एकजुट तरीके से जनता तक पहुंचाएं।

खास तौर पर सामाजिक न्याय, जातिगत भेदभाव और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर नेताओं की डिजिटल सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर नेताओं की पोस्ट, उनकी सक्रियता और पार्टी के मुद्दों को उठाने की शैली पर नजर रखने का मकसद संगठन के राजनीतिक संदेश को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।

तिवारी और राहुल के बीच बहस ने बढ़ाई चर्चा

सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और राहुल गांधी के बीच छात्र आंदोलनों के इतिहास और उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी मतभेद सामने आए। तिवारी ने तर्क दिया कि देश में कई बड़े छात्र आंदोलन स्वतःस्फूर्त रूप से उभरे थे और उनका नेतृत्व राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों ने नहीं किया था।

वहीं, राहुल गांधी ने कथित तौर पर इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक बड़ी संख्या में छात्र कांग्रेस के साथ जुड़े रहे हैं। बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बहस हुई।

बैठक के अगले दिन मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर विंस्टन चर्चिल का एक कथन साझा किया। इसमें आलोचना को महत्व देने और समय रहते उससे सीख लेने की बात कही गई थी। तिवारी की इस पोस्ट को सीडब्ल्यूसी की बैठक में हुई बहस से जोड़कर देखा गया।

कांग्रेस में संदेश प्रबंधन पर बढ़ेगा जोर

राहुल गांधी के निर्देश और खरगे की नाराजगी के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस अपने नेताओं की सार्वजनिक और डिजिटल भूमिका को लेकर अधिक गंभीर रुख अपनाने जा रही है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि संगठन के राजनीतिक मुद्दों को केवल पार्टी मंचों तक सीमित रखने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए व्यापक जनसमूह तक पहुंचाया जाए।

ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता, पार्टी लाइन के अनुरूप उनके राजनीतिक संदेश और प्रमुख मुद्दों पर उनकी सार्वजनिक भागीदारी पर संगठन की नजर और कड़ी हो सकती है।