जयपुर : मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में चातुर्मासिक प्रवास कर रहे मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में बुधवार को ‘क्षमा’ विषय पर आध्यात्मिक सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर क्षमा के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक महत्व को समझा।
मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि क्षमा कायरों का नहीं, बल्कि वीरों का गुण और आभूषण है। क्षमा से मन की कटुता समाप्त होती है, मृदुता बढ़ती है और अंत:करण प्रसन्नता से भर जाता है। उन्होंने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षमा धारण करने वाला जीव प्रसन्नता प्राप्त करता है और सभी जीवों के प्रति उसके मन में मैत्री का भाव उत्पन्न होता है। भावों की शुद्धि के कारण उसके भीतर भय भी समाप्त होने लगता है। उन्होंने कहा कि अभयदान वही व्यक्ति दे सकता है, जिसके भीतर क्षमा का भाव हो।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि आज तनाव पूरी दुनिया की एक बड़ी समस्या बन चुका है और क्षमा इस वैश्विक समस्या का प्रभावी समाधान है। क्षमा शांति का अमृत है, जबकि कटुता वैर-विरोध का विष है। क्षमा के भाव से व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर भी दुश्मनी और वैमनस्य को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगने और क्षमा करने, दोनों में अहंकार सबसे बड़ी बाधा है। विनम्रता के बिना क्षमा का वास्तविक आदान-प्रदान संभव नहीं है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर अभिनन्दन प्रभु की स्तुति से हुआ। इसके बाद तत्त्वज्ञान, प्रेक्षाध्यान एवं जप अनुष्ठान के साथ प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। साथ ही ‘भरत मुक्ति’ गेय व्याख्यान ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ा।
बारह व्रत कार्यशाला के अंतर्गत वायुकाय एवं वनस्पतिकाय के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।








