महिला आरक्षण पर आमने-सामने सरकार और कांग्रेस, जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

0

डेस्क : महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार की पहल पर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विपक्षी दलों से महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की अपील पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी की अपील को नाटक बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक रूप से बचाना है।

543 सीटों के आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार मांग करते रहे हैं कि महिला आरक्षण को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही लागू किया जाए। इसके तहत महिलाओं के लिए 182 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं। उनका कहना है कि इसके लिए परिसीमन का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

रमेश ने प्रधानमंत्री से कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से ही मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या के आधार पर महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के कारण इसके लागू होने में देरी हो रही है।

राजीव गांधी का भी किया जिक्र

कांग्रेस नेता ने महिला आरक्षण के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों, जिला परिषदों, प्रखंड पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उन्होंने दावा किया कि राजीव गांधी ने इस दिशा में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण काम किया था।

रमेश ने यह भी कहा कि सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से पारित हुआ था और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उस समय लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग की थी।

‘सरकार की दिलचस्पी परिसीमन में’

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की दिलचस्पी महिला आरक्षण को जल्द लागू करने से ज्यादा इसे परिसीमन से जोड़ने में है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अधिसूचित किया गया, जबकि संसद में परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा चल रही थी।

कांग्रेस नेता ने सरकार पर दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में सरकार के पास संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं है और यह बहुमत उसे कभी नहीं मिलेगा।

पीएम मोदी ने विपक्ष से मांगा था समर्थन

यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की गई अपील के बाद शुरू हुआ। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों से परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण का मुद्दा करीब 40 वर्षों से राजनीतिक अखाड़े में अटका हुआ है।

विस्तारित बजट सत्र में प्रस्तावित संविधान संशोधन के तहत 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। हालांकि, विपक्ष के विरोध के बीच विधेयक पारित नहीं हो सका।

अब महिला आरक्षण को लेकर केंद्र और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक तरफ सरकार विपक्ष से विधेयक के समर्थन की अपील कर रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण देने में देरी की बजाय इसे मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए।