‘दिमागी नक्सल’ पर सियासी घमासान, रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम को घेरा

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डेस्क : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। चिदंबरम के बयान पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस नेता के बयान को ‘शर्मनाक, घटिया और भद्दा’ बताते हुए इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन कुछ लोग अब भी मानसिक रूप से नक्सली सोच रखते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों से सतर्क रहने की बात कही थी।

चिदंबरम ने कहा- ‘दिमागी नक्सल होने पर गर्व’

पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है। चिदंबरम की यह टिप्पणी सामने आते ही भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया।

रविशंकर प्रसाद ने साधा निशाना

रविशंकर प्रसाद ने रविवार को बिहार स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चिदंबरम देश के पूर्व गृह मंत्री, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ और उसके उद्देश्य को समझना चाहिए था।

भाजपा सांसद ने कहा कि चिदंबरम का यह कहना कि ‘मोदी जी, मैं भी दिमागी रूप से नक्सली हूं’ बेहद आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में गंभीर मुद्दा बताया।

‘नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता’

रविशंकर प्रसाद ने केंद्र सरकार की नक्सलवाद विरोधी नीति का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के कारण देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर समेत उन क्षेत्रों में तिरंगा शान से लहरा रहा है, जहां कभी नक्सलवाद का प्रभाव था।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रभारी रहते हुए खुद इन इलाकों का दौरा किया है और वहां आए बदलाव को करीब से देखा है।

‘प्रधानमंत्री की बात का संदर्भ समझना चाहिए’

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में देश के विकास का रोडमैप भी रखा और युवाओं, किसानों तथा समाज के सभी वर्गों की बात की। इसी दौरान उन्होंने नक्सलवाद की चुनौती और उसके वैचारिक प्रभाव को लेकर आगाह किया था।

ऐसे में चिदंबरम का खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताना अब सियासी बहस का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर राजनीतिक जवाब के तौर पर देख रही है, वहीं भाजपा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया है। इस बयानबाजी के बाद ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं।