जयपुर : राजधानी जयपुर के मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र में रविवार को तेरापंथ युवक परिषद, जयपुर के तत्वावधान में भिक्षु दर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में सम्यग् दर्शन कार्यशाला के प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती कौशल्या देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एवं शासन सेवी डॉ. नरेश जी मेहता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक आचार्य भिक्षु द्वारा निर्धारित मर्यादाओं के वाचन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि आचार्य भिक्षु का धर्म दर्शन धार्मिक सिद्धांतों में किसी भी प्रकार की मिलावट का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मिलावटी वस्तुएं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं, उसी प्रकार धर्म में मिलावट आत्म-साधना और आत्म-शुद्धि के मार्ग में बाधक बनती है।
मुनिश्री ने धर्मनीति और समाजनीति अथवा राजनीति के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि आत्म-शुद्धि और सांसारिक उद्देश्यों की प्राप्ति के मार्ग अलग-अलग हैं। दोनों का अपना स्वतंत्र महत्त्व है, लेकिन इन्हें आपस में मिलाने से मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के विचारों के अनुरूप धर्म की शुद्धता और आध्यात्मिक साधना की महत्ता पर जोर दिया।
भिक्षु दर्शन विशुद्ध आध्यात्मिक दर्शन: मुनिश्री संभव कुमार जी
कार्यक्रम में मुनिश्री संभव कुमार जी ने आचार्य भिक्षु की भक्ति से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अपने संबोधन में उन्होंने भिक्षु दर्शन को क्रांतिकारी एवं विशुद्ध आध्यात्मिक दर्शन बताया। धर्म के क्षेत्र में प्रचलित कुछ मान्यताओं पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा, “भिखारी को भिखारी मानकर दान देना पुण्य और उसे भाई मानकर देना पाप, यह कैसी विडंबना है?”
मुनिश्री ने दान, सेवा और सामाजिक व्यवहार के उद्देश्यों पर चिंतन करते हुए कहा कि किसी भी कार्य के पीछे की भावना और उसका वास्तविक प्रभाव समझना आवश्यक है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के मोक्ष दर्शन की व्याख्या करते हुए बताया कि संयम की साधना करना और संयम के पालन में सहयोग देना ही मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है। उनके अनुसार, असंयम को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियां आत्म-कल्याण का साधन नहीं बन सकतीं।
राष्ट्रीय स्तर पर जयपुर परिषद को मिला तृतीय स्थान
कार्यक्रम के प्रारंभ में तेरापंथ युवक परिषद, जयपुर के अध्यक्ष श्री प्रवीण जैन ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने जानकारी दी कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सम्यग् दर्शन कार्यशाला प्रतियोगिता में जयपुर तेरापंथ युवक परिषद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में कार्यशाला के प्रतिभागियों को उनके ज्ञान, प्रतिभा और लगन के लिए प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान जैन संस्कारक श्री गौतम जी बरड़िया ने आगामी दीपावली पर्व के संदर्भ में विधि-विधानपूर्वक दीपावली पूजन भी संपन्न कराया।
श्रद्धालुओं की रही सहभागिता
आयोजन में वरिष्ठ श्रावक श्री पन्नालाल जी बैद, परिषद के मंत्री श्री जयंत जी भूरा, सहमंत्री श्री तनुज जी कोठारी, कोषाध्यक्ष श्री अनिल जी दुगड़, श्री प्रवीण जी बोथरा, श्री अंकित जी जैन सहित परिषद के अनेक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की प्रायोजक श्रीमती जतन देवी जी भंडारी एवं श्रीमती प्रेम जी मेहता रहीं। आयोजकों ने उनके सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। भिक्षु दर्शन कार्यशाला के माध्यम से श्रद्धालुओं को आचार्य भिक्षु के आध्यात्मिक विचारों, संयम की साधना और धर्म की शुद्धता के महत्त्व को समझने का अवसर मिला।









