डेस्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को अब सुनिश्चित मानकर नहीं चला जा सकता। उन्होंने समुद्री व्यापार की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन एक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
जयशंकर ने मनीला में आयोजित आसियान-पोस्ट मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस विद इंडिया 2026 में अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि भारत और आसियान दोनों अपने भविष्य की संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा के अलावा समुद्री व्यापार भी चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि कई देश इसके लिए काफी हद तक निर्भर हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। यह दोनों पक्षों के लिए अधिक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि भारत-आसियान सहयोग का दायरा अब व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर प्रतिभा एवं लोगों की आवाजाही, प्रौद्योगिकी, डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित विकास, स्थिरता और कनेक्टिविटी तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जोखिम कम करने और आपूर्ति एवं सहयोग के स्रोतों में विविधता लाने के लिए भारत और आसियान के बीच गहरा सहयोग आवश्यक है।
गौरतलब है कि फिलीपींस ने वर्ष 2026 के लिए आसियान की अध्यक्षता संभाली है। जयशंकर 22 से 23 जुलाई तक फिलीपींस के दौरे पर हैं, जहां वह आसियान के तहत होने वाली विभिन्न विदेश मंत्री स्तर की बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वह आसियान-भारत बैठक के अलावा ईस्ट एशिया समिट (EAS) और आसियान रीजनल फोरम (ARF) की बैठकों में भी भाग लेंगे।
इसके साथ ही जयशंकर आसियान से संबंधित बैठकों से इतर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। उनके विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है।
फिलीपींस ने 2026 के लिए आसियान की अध्यक्षता “Navigating Our Future, Together” थीम के साथ संभाली है। इसके तहत क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा, आर्थिक एकीकरण, डिजिटल बदलाव, समावेशी विकास और लोगों के सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।








