डेस्क : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के Gen-Z को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार का विरोध करना देश का विरोध करना नहीं है। लोकतंत्र में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और गलतियों की ओर ध्यान दिलाना देशहित में भी हो सकता है।
मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह अच्छी बात है कि सरकार और देश के विरोध के बीच अंतर को स्वीकार किया गया है। उनके मुताबिक सरकार का विरोध कई बार देश के लिए फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि इससे सरकार को अपनी गलतियों को सुधारने और फैसलों को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
‘विरोध से सरकार को जवाबदेह बनने में मदद’
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की अपनी जगह है। यदि नागरिक या युवा किसी नीति अथवा फैसले के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उसे सीधे देशविरोधी गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि विरोध के जरिए सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनता है और इससे जनहित में सुधार की संभावना बढ़ती है।
उन्होंने हाल के NEET आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के आंदोलनों ने सरकार को जवाबदेह बनाने में मदद की है। उम्मीद है कि इससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में सुधार होगा और विद्यार्थियों की शिकायतों को अधिक गंभीरता से सुना जाएगा।
क्या बोले थे मोहन भागवत?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में करीब 2,000 Gen-Z और Gen-Alpha प्रतिभागियों को संबोधित किया था।
युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में भागवत ने कहा था कि यदि Gen-Z के युवा आंदोलन कर रहे हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वे राष्ट्रविरोधी हैं। उन्होंने युवाओं को देश की अगली पीढ़ी बताते हुए उनके साथ संवाद और बेहतर संबंध स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भागवत की इस टिप्पणी को युवाओं के आंदोलनों और उनकी शिकायतों को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक संदेश के रूप में देखा गया। उनके बयान के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों को परेशान न करने की अपील
उमर अब्दुल्ला ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को कथित तौर पर परेशान किए जाने और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की खबरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को परेशान करने की कार्रवाई बंद होनी चाहिए।
उनका कहना था कि युवाओं के सवालों और असहमति को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल करना और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना नागरिक अधिकारों का हिस्सा है।
Gen-Z को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
हाल के युवा आंदोलनों के बाद देश की राजनीति में Gen-Z को लेकर चर्चा तेज हुई है। राजनीतिक दलों की ओर से युवाओं के मुद्दों और उनकी चिंताओं पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए भी युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिशें बढ़ी हैं।
ऐसे समय में मोहन भागवत का यह कहना कि युवा आंदोलनकारी होने मात्र से राष्ट्रविरोधी नहीं हो जाते और उमर अब्दुल्ला का उनके बयान का समर्थन करना, राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों नेताओं की टिप्पणियों में एक साझा बात यह सामने आती है कि सरकार की आलोचना और देश के प्रति असहमति को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।








