डेस्क : लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा है कि डीएमके परिसीमन का पहले भी विरोध करती रही है और आगे भी इसका विरोध जारी रखेगी। उनके इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है कि पार्टी केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है।
उदयनिधि ने साफ किया रुख
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि परिसीमन कोई नया मुद्दा नहीं है। डीएमके शुरुआत से ही इसके खिलाफ रही है और आगे भी अपने रुख पर कायम रहेगी। उनका बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
दरअसल, कुछ समय पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि केंद्र सरकार यदि परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव में कुछ बदलाव करती है तो डीएमके अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। इससे विपक्षी गठबंधन के भीतर भी असमंजस की स्थिति पैदा हुई थी।
राहुल गांधी ने दी थी कड़ी चेतावनी
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी डीएमके समेत तमिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियों से विरोध की अपील कर चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि सभी राष्ट्रीय और तमिल दलों को इस प्रस्ताव का विरोध करना चाहिए।
उन्होंने यहां तक कहा था कि जो भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन करेगा, वह तमिलनाडु की जनता के साथ धोखा करेगा। राहुल ने समर्थन करने वालों के लिए तमिल राजनीति में इस्तेमाल होने वाले ‘एट्टाप्पन’ शब्द का भी इस्तेमाल किया था।
पहले नरम रुख की आई थी खबर
अप्रैल में संसद में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस के साथ खड़ी रही डीएमके के रुख में बदलाव की अटकलें तब तेज हुईं, जब पार्टी की ओर से कुछ शर्तों के साथ संभावित समर्थन की चर्चा सामने आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके ने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखना, सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान अनुपात में वृद्धि और प्रस्तावित परिसीमन में राज्यवार सीटों की संख्या स्पष्ट करना शामिल था।
543 से 850 सीटों का प्रस्ताव
केंद्र सरकार के प्रस्ताव के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किए जाने की चर्चा है। इसके तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 850 किए जाने की बात सामने आई है।
डीएमके का तर्क है कि परिसीमन के फैसले में दक्षिणी राज्यों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों के पुनर्वितरण से नुकसान नहीं होना चाहिए।
उदयनिधि के ताजा बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि कम से कम मौजूदा स्थिति में डीएमके केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव के समर्थन में खड़ी नहीं है। इससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और विपक्षी राजनीति में टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।








