जयपुर : मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र में बुधवार को श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में मुनिश्री तत्त्व रूचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में मैत्री पर्व का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने परस्पर खमत-खामणा करते हुए बीती भूलों को विस्मृत कर प्रेम, मैत्री और सौहार्द के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
मैत्री पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री तत्त्व रूचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि “भूलों को भुलाओ और फटे दिलों को मिलाओ”, यही मैत्री के महान पर्व का मूल संदेश है। उन्होंने कहा कि खमत-खामणा स्वयं को झुकाने, अपनी भूल स्वीकार करने और दूसरों की भूलों को क्षमा करने का अवसर है। क्षमायाचना तनाव से मुक्ति और प्रसन्नता की प्राप्ति का श्रेष्ठ माध्यम है। यह पर्व समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला आध्यात्मिक उपक्रम है।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने “बड़े प्रेम से मिलजुल सीखें, मैत्री मंत्र महान रे” गीत का मधुर संगान किया। उन्होंने कहा कि दूसरों की भूलों को भुलाना और अपनी भूलों को सुधारना ही मैत्री पर्व की वास्तविक सार्थकता है। अहंकार क्षमायाचना के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए मनुष्य को झुकना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीचे झुकने वाला घड़ा ही पानी से भरता है। विनम्रता जीवन का वरदान है, जबकि अहंकार व्यक्ति को भीतर से रिक्त कर देता है।
उन्होंने कहा कि क्षमायाचना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और कलात्मक जीवन की दिशा दिखाने वाली साधना है। ‘क्षमावीरस्य भूषणम्’ अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। जो व्यक्ति क्षमा करने की क्षमता रखता है, वही वास्तविक अर्थों में आत्मबल का परिचय देता है।
मुनिश्री ने मैत्री दिवस को “फॉरगिवनेस एंड फॉरगेटफुलनेस” का पर्व बताते हुए कहा कि खमत-खामणा मन के पाप, ताप और संताप को दूर कर उसे हल्का करने की प्रक्रिया है। क्षमापना अहिंसा की उत्कृष्ट साधना है, जो मनुष्य को भीतर से निर्मल बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने काव्यात्मक भाव में कहा—“हम आग बुझाने वाले हैं, हम आग लगाना क्या जानें” और “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।”
इस अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा सहित विभिन्न संस्था-परिवारों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक खमत-खामणा किया और अतीत की भूलों को विस्मृत कर आपसी प्रेम एवं मैत्री को और मजबूत करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन तेरापंथी सभा के सहमंत्री श्री सुरेश जी बरड़िया ने किया। इस अवसर पर शासन सेवी डॉ. नरेश जी मेहता, मुख्य ट्रस्टी श्री आलोक जी हीरावत, पूर्व अध्यक्ष श्री हिम्मत जी डौसी, उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र जी बांठिया, तेरापंथ महिला मंडल शहर की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जी जैन, मंत्री श्रीमती पायल जी जैन, श्री राजेंद्र जी जैन (विरासत), ते.यु.प. से श्री तनुज जी कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के पश्चात तप अनुमोदना का क्रम हुआ। तपस्विनी श्रीमती इंद्रा देवी संचेती, धर्मपत्नी श्री देवेंद्र जी संचेती ने नौ की तपस्या तथा श्रीमती अंकिता जी गोठी, धर्मपत्नी श्री अभिषेक जी गोठी ने ग्यारह की तपस्या का प्रत्याख्यान कि








