चौरासी लाख जीव योनियों से खमतखामणा का है दिन : युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण

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लाडनूं : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में बुधवार को पर्वाधिराज पर्युषण तथा भगवती संवत्सरी की मंगल आराधना के उपरान्त बुधवार को चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने आराध्य की मंगल सन्निधि में क्षमापना पर्व को भी आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया। मन की गांठों को खोलने, क्षमा देने और क्षमा लेने का मानों महोत्सव-सा दिखाई दे रहा था। युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ से ही नहीं, सकल चराचर जगत से खमतखामणा की तो उपस्थित साधु, साध्वीवृंद, समणीवृंद, मुमुक्षुवृंद ही नहीं, श्रावक-श्राविकाओं ने भी अपने आराध्य से खमतखामणा की। तदुपरान्त आपसी खमतखामणा का स्वर मानों पूरे दिन सुनाई देता रहा। क्षमापना का यह उत्सव आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अलग ही समां बांध रहा था।
बुधवार को सूर्योदय से पूर्व ही सुधर्मा सभा में चारित्रात्माओं सहित श्रावक-श्राविकाओं की विराट उपस्थिति दिखाई दे रही थी। कुछ समय बाद वर्तमान तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी, युवाचार्यश्री सहित मंचासीन हुए। आचार्यश्री ने आज का बृहद् मंगलपाठ भी यहीं से उच्चरित किया।
अणुव्रत समिति की ओर से श्री शांतिलाल बैद, पारमार्थिक शिक्षण संस्था की ओर से श्री बजरंग जैन, अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री मदनचंद दुगड़, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री अमरचंद लुंकड़, जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति श्री बच्छराज दुगड़, आचार्यश्री भिक्षु समाधि स्थल-सिरियारी के मंत्री श्री मर्यादा कोठारी, भोजन व्यवस्था की ओर से श्री पन्नालाल बैद, आवास व्यवस्था की ओर से श्री सुनील बोहरा, तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं, स्थानीय टीपीएफ के मंत्री, आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति-लाडनूं के अध्यक्ष श्री प्रमोद बैद ने अपनी अभिव्यक्ति दी।
साध्वीवर्या सम्बुद्धयशाजी, साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी व युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी ने क्षमापना पर्व के संदर्भ में अपने उद्गार व्यक्त किए। साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवृंद व समणीवृंद ने आचार्यश्री को सविधि वंदन करते हुए आचार्यश्री तथा युवाचार्यश्री से खमतखामणा किए। युवाचार्यश्री ने भी साध्वीवृंद व समणीवृंद से खमतखामणा किए।
तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस अवसर पर चतुर्विध धर्मसंघ को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि भगवती संवत्सरी सहित हम सभी ने अष्टदिवसीय पर्युषण महापर्व की आराधना की। आज के दिन चौरासी लाख जीवयोनियों से खमतखामणा का है। हम समाज या समूह का जीवन जीते हैं। तो किसी से कार्य करने, कराने का, दिशा-निर्देश देने आदि का कार्य भी पड़ता है। युवाचार्यश्री महावीरकुमार से सबसे ज्यादा निकटता से कार्य पड़ता रहता है। ये तो कभी भी मेरे आसपास ही रहने वाले हैं। वर्षों से यों तो कार्य से जुड़े थे। कभी सचिव थे, अब तो युवाचार्य हो गए हैं। कभी कोई कुछ कटु या अप्रिय लगा हो तो युवाचार्यजी से बारम्बार खमतखामणा। युवाचार्यश्री ने भी आचार्यश्री को वंदन कर खमतखामणा किए। साध्वीप्रमुखाजी से प्रायः दिन का कार्य होता है। दिन में प्रायः कई बार पधारना होता है। यदा-कदा मीटिंग, गोष्ठी, संघीय बात आदि का कार्य होता है। वैसे उम्र में भी बड़े हैं। कभी कुछ कटु लगा हो तो आपसे भी बारम्बार खमतखामणा। साध्वीप्रमुखाजी ने भी नीचे विराजकर आचार्यश्री को वंदन कर खमताखामणा किए। आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इसी प्रकार आचार्यश्री ने साध्वीवर्याजी ने खमतखामणा किए तो साध्वीवर्याजी ने आचार्यश्री को वंदन कर आचार्यश्री से खमतखामणा किए। इसके उपरान्त आचार्यश्री ने गुरुकुलवासी संतों से बारम्बार खमतखामणा किए। बहिर्विहार में रहने वाले संतों, गुरुकुलवासी साध्वी समुदाय, समणीवृंद, मुमुक्षु भाई-बहन, बोधार्थी आदि सभी से खमतखामणा किए। फिर आचार्यश्री ने अपने सम्पूर्ण श्रावक समाज व श्राविका समाज से भी बारम्बार खमतखामणा किए। जैन विश्व भारती, मान्य विश्वविद्यालय, प्रवास व्यवस्था समिति-लाडनूं, केन्द्रीय संस्थाओं, कल्याण परिषद आदि सभी से बारम्बार खमतखामणा किए। जैन शासन के अन्य आचार्यों आदि के साथ भी आचार्यश्री ने खमतखामणा किया। जैनेतर समाज के धर्मगुरुओं से भी खमतखामणा किए। तेरापंथ समाज से गणमुक्त साधुओं आदि से भी खमतखामणा। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक-आध्यात्मिक, गुरुकुलवासी कर्मचारियों, राजनीति के क्षेत्रों के लोगों आदि सहित समस्त चराचर जगत से खमतखामणा किया। सभी के साधना का अच्छा क्रम चलता रहे।
साधु-साध्वियों के आपसी खमतखामणा के संदर्भ में साध्वी समुदाय की ओर से साध्वी जिनप्रभाजी ने संत समुदाय से खमतखामणा किए तो संत समुदाय की ओर से मुनि दिनेशकुमारजी ने साध्वीवृंद से खमतखामणा किए। श्रावक-श्राविकाओं में परस्पर खमतखामणा से पहले सभी ने आचार्यश्री, युवाचार्यश्री, साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी आदि से खमतखामणा का क्रम रहा। खमतखामणा का यह क्रम आचार्यश्री महाश्रमणजी योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री निर्मल कोटेचा ने श्राविका समाज से तथा श्राविका समाज की ओर श्री कनक बरमेचा ने सम्पन्न किए। आचार्यश्री के मंगलपाठ से क्षमापना पर्व सुसम्पन्न हुआ।