यूपीआई शुल्क पर सरकार का दो टूक जवाब, वापस लेने का सवाल नहीं

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डेस्क : 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को वापस लेने का फिलहाल कोई सवाल नहीं है। नया शुल्क ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

सरकार के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर लागू किया जाएगा। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे।

इस फैसले को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है। उन्होंने सरकार से यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है।

राहुल गांधी के आरोपों को सरकार ने खारिज किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ और समावेशी बनाने के उद्देश्य से स्वतंत्र रूप से लिए जा रहे हैं। सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को भी खारिज किया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमडीआर सीधे ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह मर्चेंट भुगतान व्यवस्था के भीतर लागू होने वाला शुल्क है। सरकार के मुताबिक, यूपीआई का व्यक्तिगत उपयोग पहले की तरह निशुल्क रहेगा।

विपक्ष का तर्क है कि व्यापारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि एमडीआर व्यवस्था डिजिटल भुगतान से जुड़े बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस बीच, सरकार के फैसले के खिलाफ विपक्ष की ओर से विरोध जारी है। सरकार के ताजा रुख के बाद अब 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई एमडीआर व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।