नाम और चुनाव चिन्ह बदले, ममता बोलीं- लोकतंत्र के लिए काला दिन

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डेस्क : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि आज का दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में काला दिन है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद के बीच अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।

चुनाव आयोग ने फिलहाल मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक फूल और घास चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। आयोग के अनुसार, दोनों गुट पार्टी के वास्तविक प्रतिनिधि होने का दावा कर रहे हैं और इस विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।

ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह संवैधानिक संस्था का सम्मान करती हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन मानती हैं। उन्होंने फैसले को असंवैधानिक, गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताया तथा राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। ये आरोप ममता बनर्जी के हैं; स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

इस घटनाक्रम के बीच नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम और असम में कांग्रेस उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा की।

चुनाव आयोग की यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों की पहचान स्पष्ट रखने के लिए अंतरिम तौर पर लागू की गई है। मूल पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।